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    Bhagalpur News: रंग लाएगी भागलपुर नगर निगम की योजना, गंगा जल से होगा भूगर्भ जल का संरक्षण

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 03:08 PM (IST)

    भागलपुर में भूगर्भ जल स्तर गिरने से गर्मियों में पेयजल संकट गहरा रहा है। नगर निगम ने गंगा जल आपूर्ति की ₹650 करोड़ की योजना बनाई है, जिससे घरों तक पान ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, भागलपुर। शहरी क्षेत्र में भूगर्भ जल स्तर में निरंतर गिरावट आ रही है, जिसके कारण शहर के 51 वार्डों के लोगों को गर्मियों में पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। एक दशक पहले 50 फीट की गहराई में मिलने वाला पानी अब 90 से 120 फीट तक भी नहीं मिल रहा है। शहरवासी 350 से 450 फीट तक बोरवेल करवा रहे हैं, जिससे जल संकट गहराता जा रहा है।

    हालांकि, भूगर्भ जल संरक्षण के लिए नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण योजना बनाई है, जिसके तहत गंगा के पानी की घर-घर आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए लगभग 650 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना का काम चल रहा है। बरारी में जल उपचार संयंत्र तैयार है। इस वर्ष जलमीनार तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था कर दी जाएगी। 45 एमएलडी गंगा जल की आपूर्ति से उतना ही भूगर्भ जल बचेगा।

    प्याऊ और अन्य जलस्रोतों पर वाटर हार्वेस्टिंग पिट का निर्माण किया जा रहा है। पिछले चार वर्षों में 250 से अधिक वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाए गए हैं।

    निगम के योजना शाखा प्रभारी आदित्य जायसवाल ने बताया कि पिछले वर्ष 125 पिट का निर्माण कुएं, प्याऊ, चापाकल और सरकारी कार्यालयों में किया गया था। इस वर्ष 100 नए वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाए जाएंगे, जिससे भूगर्भ जल की बर्बादी को रोकी जा सकेगी।

    नाले के पानी का भी होगा शोधन

    घर में जल आपूर्ति के बाद नालों के माध्यम से बर्बाद हो रहे पानी का भी शोधन किया जाएगा। साहेबगंज में 413 करोड़ की लागत से निर्मित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 45 एमएलडी है। इसके निर्माण से शहर का पानी गंगा में सीधे प्रवाहित नहीं होगा। जिसका उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाना है।

    प्लांट पूरी तरह से जल शोधन के लिए तैयार है। इसकी विशेषता यह है कि कचरे के अवशेषों से बिजली उत्पन्न होगी। शोधन प्रक्रिया के बाद टैंक में जमा कचरे से मिथेन गैस बनेगी, जिससे 300 केवीए का बिजली उत्पादन किया जाएगा।

    इस ऊर्जा से प्लांट के सभी संयंत्रों का संचालन होगा। नाले के पानी का शोधन कर गंगा में प्रवाहित किया जाएगा, जिससे गंगा की धारा प्रदूषित नहीं होगी।