नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। दुनिया की सबसे पुरानी मोटरसाइकिल कंपनी जिसका स्लोग ही था- 'मेड लाइक अ गन', यानि कि जिसे बंदूक की तरह बनाया गया हो। दुनिया में इस कंपनी ने पहले ही अपनी पकड़ बना रखी थी, लेकिन भारत में इसका शुभारंभ 1949 में हुआ। हम बात कर रहे हैं मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) की, जिसने भारतीय लोगों को बुलेट (Bullet) जैसी बाइक से परिचय करवाया था।

अपने बोल्ड लुक, ज्यादा वजन और एडवेंचर बाइक मॉडल के साथ इस कंपनी ने भारत में अपनी एक अलग जगह बनाई। इसका क्रेज भारत में इतना ज्यादा था कि आज भी जब बुलेट बाइकों की बात की जाती है तो सबसे पहले रॉयल एनफील्ड का ही नाम सामने आता है।

भारत में Royal Enfield की शुरुआत

भारत में आने से पहले ही रॉयल एनफील्ड पूरी दुनिया में अपने बाइकों से धूम मचा रही थी। इस कंपनी की शुरुआत 1901 में हो गई थी, लेकिन भारत में यह 1949 में लॉन्च हुई और इसका नाम एनफील्ड इंडिया (Enfield India) रखा गया। इसके क्लिप-ऑन हैंडलबार, रियर सेट, स्वेप्ट-बैक एग्जॉस्ट में भारतीय ग्राहकों को बहुत कुछ नया देखने को मिला और देखते ही देखते रॉयल एनफील्ड ने क्रूजर, ऑफ-रोड और नेकेड बाइक्स सेगमेंट में लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली।

60 से 80 के दशक तक आते-आते यह भारतीय लोगों के लिए सिर्फ एक बाइक नहीं रह गई थी, बल्कि यह लोगों के स्टेटस सिंबल की तरह देखी जाने लग गई थी। इसे चलाने वाला भी बुलेट के लुक की तरह ही बोल्ड समझा जाने लगा था।

रॉयल एनफील्ड के मॉडल्स

भारत में एनफील्ड इंडिया ने कई मॉडल्स ने अपने कदम रखें। इसमें थंडरबर्ड 500, थंडरबर्ड 300, क्लासिक 500, क्लासिक 350, बुलेट 350, बुलेट 500 और कॉन्टिनेंटल जी.टी जैसे बहुत से मॉडलों को शामिल किया गया था। पर इन सबमें सबसे ज्यादा लोकप्रियता बुलेट 350 (Bulllet 350) को मिली।

भारतीय आर्मी में बुलेट की एंट्री

भारत में अपने कदम रखने के 6 सालों के अंदर ही एनफील्ड इंडिया की मोटरसाइकिलों ने भारतीय आर्मी को शानदार बाइकिंग के मजे दिए। 1955 में, भारत सरकार देश की सीमा पर गश्त लगाने के लिए अपने पुलिस बलों और सेना के लिए एक दमदार बाइक की तलाश कर रही थी। फिर उनकी नजर दमदार 350cc वाली बुलेट मोटरसाइकिल पर पड़ी। इसके लुक ने तो पहले ही लोगों को अपना दीवाना बना रखा था, लेकिन इसके ऑफ रोड बाइकिंग क्षमता ने सेना का ध्यान अपनी ओर खींचा।

भारत सरकार ने बुलेट 350 मोटरसाइकिलों के 800 यूनिट्स का ऑर्डर दिया था। उस समय रॉयल एनफील्ड मद्रास मोटर्स के तहत बिक्री की जाती थी और यह ऑर्डर उस समय के हिसाब से एक बहुत बड़ा ऑर्डर था। आर्मी में शामिल होने के बाद से एनफील्ड इंडिया को एक अलग पहचान मिली और भारतीय ऑटो बाजार में इसे सम्मान के साथ देखा जाने लगा। इसकी चमक इतनी थी कि आज भी यह कंपनी भारत में बिक्री होने वाली टॉप-5 दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों में से एक है।

80 के दशक का एक मरता हुआ ब्रांड

80 के दशक के अंत तक आते-आते एनफील्ड इंडिया अपनी लोकप्रियता खोने लग गई थी। बाजार में कई तरह से ब्रांड्स का कब्जा था और वहीं, पुराने डिजाइन अब लोगों का ध्यान अपनी ओर नहीं खींच रहे थे। फिर 1994 में एनफील्ड इंडिया का आयशर समूह के साथ विलय हुआ और इसका नाम बदलकर रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) कर दिया गया।

एक नई पहचान के साथ रॉयल एनफील्ड को जैसे एक नया जीवन भी मिल गया। ब्रांड ने अपने प्रोडक्शन लाइनअप में सुधार की और नई मोटरसाइकिलों को पेश करने के लिए गंभीर प्रयास शुरू कर दी। इसने 2002 में थंडरबर्ड, 2008 में क्लासिक रेंज और शॉटगन जैसे बहुत से रेंज को शुरू किया। सभी भारतीय बाजार में एक हिट साबित हुई और इसकी लोकप्रियता अब भी बरकरार है।

Royal Enfield ने भारत में अपना इस बहुत लंबा सफर तय किया है। आज भी इस बाइक को चलाना किसी शान से कम नहीं समझा जाता है। चाहे युवा पीढ़ी हो या फिर उसके बाद की जनरेशन, रॉयल एनफील्ड की मोटरसाइकिलें हर उम्र के लोगों के लिए बिल्कुल परफेक्ट है।

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Edited By: Sonali Singh

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