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    Pak Auto Industry धड़ाम! पड़ोसी मुल्क ने महीने भर में बेची जितनी गाड़ियां, भारतीयों ने उतनी एक दिन में खरीद डालीं

    Updated: Thu, 25 Apr 2024 04:00 PM (IST)

    पाकिस्तान ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन(PAMA) द्वारा साझा किए गए मासिक बिक्री आंकड़ों के अनुसार मार्च 2024 में देश में यात्री वाहन की बिक्री 7672 यूनिट रही जो पिछले साल इसी महीने में बेची गई गाड़ियों की तुलना में 6.1 प्रतिशत कम है। वैसे तो पाकिस्तान की भारत से कोई तुलना ही नहीं फिर भी अगर आंकड़ो की बात करें तो दोनों में धरती और आसमान का अंतर है।

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    Pak Auto Industry काफी खस्ताहाल हो गई है।

    ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार बद से बदतर होती होती जा रही है। पाकिस्तान ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन(PAMA) द्वारा साझा किए गए मासिक बिक्री आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2024 में देश में यात्री वाहन की बिक्री 7,672 यूनिट रही, जो पिछले साल इसी महीने में बेची गई गाड़ियों की तुलना में 6.1 प्रतिशत कम है।

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    खस्ताहाल हुई पाक ऑटो इंडस्ट्री  

    जहां दुनिया भर में ऑटोमोटिव उद्योग बढ़ती इनपुट लागत, समग्र मुद्रास्फीति से जूझ रहे हैं, वहीं पाकिस्तानी खरीदारों के पास हाल ही में अर्थव्यवस्था की खराब स्थिति, मुद्रा में गिरावट और वाहन खरीद पर भारी टैक्स वसूलने जैसी चुनौतियां भी हैं। इसके अलावा लोगों को गाड़ी खरीदने पर आसानी से लोन भी नहीं मिल पा रहा है। 

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    इंडियन कार मार्केट पूरी तरह से गुलजार है। वैसे तो पाकिस्तान की भारत से कोई तुलना ही नहीं, फिर भी अगर आंकड़ो की बात करें तो दोनों में धरती और आसमान का अंतर है। इंडियन ऑटो मार्केट में केवल 24 मार्च को ही 3.69 लाख से अधिक कारें बेची गईं।

    भारत और पाक में धरती-आसमान का अंतर 

    सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2023 में पिछले साल इसी महीने में बेची गई 3,35,976 यूनिट्स की तुलना में 10 प्रतिशत की पर्याप्त वृद्धि दर्ज की गई है।

    धीरे-धीरे कारोबार समेट रही कंपनियां 

    यह स्पष्ट है कि दक्षिणी एशिया क्षेत्र में ऑटोमोटिव निर्माताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और पाकिस्तान उभरती गतिशीलता के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष कर रहा है। दरअसल, कई प्रमुख निर्माताओं ने पहले ही देश में अपना परिचालन बंद कर दिया है, जबकि ऐसी अफवाह है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो अन्य लोग बाहर निकलने पर विचार कर रहे हैं।

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