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    भारत में यहां चली थी पहली ट्रेन; 1 घंटे 15 मिनट में तय की थी 34km का सफर, पढ़ें ऐतिहासिक सफर की कहानी

    1853 को मुंबई से ठाणे के बीच भारत की पहली यात्री ट्रेन चली जिसमें 400 यात्री सवार थे। इस ट्रेन ने 34 किलोमीटर की दूरी 1 घंटे 15 मिनट में तय की। साहिब सुल्तान और सिंध नाम के तीन इंजनों ने 14 लकड़ी की बोगियों के साथ इस ट्रेन को खींचा। इस पहली यात्रा ने भारत के परिवहन को नई दिशा दी और अर्थव्यवस्था समाज और कनेक्टिविटी को बदल दिया।

    By Mrityunjay Chaudhary Edited By: Mrityunjay Chaudhary Updated: Fri, 29 Aug 2025 06:00 AM (IST)
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    मुंबई से ठाणे भारत की पहली यात्री ट्रेन चली थी।

    ऑटो डेस्क, नई दिल्‍ली। मुबंई में हाल के समय लोकल ट्रेन से लेकर मेट्रो तक की सुविधा मिलती है। इनकी वजह से लोगों को मुंबई में एक कोने से लेकर दूसरे कोने में सफर करना काफी आसान हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मुंबई के लोगों का लोकल ट्रेन और मेट्रो चलने से पहले जीवन कैसा था? 16 अप्रैल, 1853 को भारत ने एक ऐसा ऐतिहासिक पल देखा जिसने देश का भविष्य हमेशा के लिए बदल दिया। मुंबई के बोरी बंदर से ठाणे के लिए एक ट्रेन चली, जिसमें लगभग 400 यात्री सवार थे। इस ट्रेन ने 34 किलोमीटर की दूरी 1 घंटे 15 मिनट में तय की। यह देश की पहली यात्री ट्रेन सेवा थी और इसने एक ऐसी यात्रा की शुरुआत की जिसने भारत की अर्थव्यवस्था, समाज और कनेक्टिविटी को बदल दिया।

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    ऐतिहासिक सफर की कहानी

    मुंबई के बोरी बंदर से ठाणे के लिए चली ऐतिहासिक सफर को साहिब, सुल्तान और सिंध नाम के तीन इंजनों ने 14 लकड़ी की बोगियों के साथ संचालित किया गया था। यह ट्रेन पहर 3:30 बजे, हजारों दर्शकों की भीड़ और 21 तोपों की सलामी के बीच ट्रेन स्टेशन से रवाना हुई। बहुत से लोगों के लिए यह पहली बार था, जब वह किसी ट्रेन को देख या उसमें बैठ रहे थे। इस ट्रेन सर्विस को छोटी उपनगरीय यात्रा के रूप में शुरू हुई थी, वह जल्द ही दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में से एक की नींव बन गई।

    पहली यात्री ट्रेन ने रखी आधुनिक भारत की नींव

    • मुंबई और ठाणे के बीच की यह पहली यात्रा को अक्सर आधुनिक भारत के परिवहन की सुबह के रूप में याद किया जाता है। दूसरे देशों के विपरीत, जहां रेलवे को शुरू में विरोध का सामना करना पड़ा, भारतीयों ने यात्रा के इस नए साधन को तुरंत अपना लिया। यह सस्ता, तेज और सुरक्षित था, और जल्द ही पूरे उपमहाद्वीप में आवाजाही की रीढ़ बन गया।
    • 1853 की उस पहली छोटी यात्रा से, भारत का रेलवे को गति से फैलाने में मदद किया। 1880 तक, देश में पहले से ही 9,000 किलोमीटर से ज्यादा कि रेलवे लाइन बिछ चुकी थीं। इस नेटवर्क ने शहरों और गांवों को जोड़ा और यह सिर्फ लोगों को नहीं, बल्कि सामान और पशुओं को ले जाने लगा गया।

    एक यात्रा जिसने एक स्थायी विरासत बनाई

    1853 की वह पहली यात्रा सिर्फ एक नई परिवहन सेवा से कहीं अधिक थी। यह एक ऐसी प्रणाली की शुरुआत थी जिसने भारत के आधुनिकीकरण को बढ़ावा दिया, दूर-दराज के क्षेत्रों को जोड़ा और देश की प्रगति के सबसे मजबूत प्रतीकों में से एक बन गई। 170 से अधिक वर्षों के बाद भी, भारतीय रेलवे राष्ट्र की जीवनरेखा बनी हुई है।

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