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    15 साल पुराना वाहन रखना हो जाएगा महंगा, दोबारा रजिस्ट्रेशन पर देनी होगी 25 गुना ज्यादा फीस

    By Ankit DubeyEdited By:
    Updated: Sat, 05 Oct 2019 04:15 PM (IST)

    सड़क परिवहन मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि वह पुराने निजी वाहनों की दोबोरा रजिस्ट्री कराने की फीस में 25 फीसद की बढ़ोतरी की जाए

    15 साल पुराना वाहन रखना हो जाएगा महंगा, दोबारा रजिस्ट्रेशन पर देनी होगी 25 गुना ज्यादा फीस

    नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। इन दिनों अगर आप भी 15 साल से पुराना वाहन चला रहे हैं तो वह आपको कंगाल कर सकते हैं। जी हां, एक तो इतने पुराने वाहनों की मेंटेनेंस और दोबारा रजिस्ट्रेशन पर 25 गुना ज्यादा दी जाने वाली कीमत एक नए वाहन से भी ज्यादा महंगी पड़ सकती है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक सड़ंक परिवहन मंत्रालय ने का वॉल्यन्ट्री स्क्रैपिंग ऑफर अगर सरकार ने स्वीकार कर लिया तो आपको अपने वाहन की दोबारा रजिस्ट्री कराने के लिए 25 गुना तक ज्यादा दाम चुकाने होंगे।

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    टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार सड़क परिवहन मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि वह पुराने निजी वाहनों की दोबोरा रजिस्ट्री कराने की फीस में 25 फीसद की बढ़ोतरी की जाए। इतना ही नहीं, और पुराने कमर्शियल वाहनों की वार्षिक फिटनेस की फीस में 125 फीसद तक की वृद्धि की जा सकती है। ऐसे में सभी विभागों को मिनिस्ट्री ने इस बारे में पॉलिसी पेपर भेजकर उनकी राय मांगी है। बता दें, सरकार अपने इस नियम को साल 2020 के मध्य से लागू कर सकती है। इसके अलावा सरकार ने स्क्रैपिंग के लिए अप्रूव्ड सेंटर्स बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

    नया प्रस्ताव अगर लागू होता है तो 15 साल पुराने निजी वाहनों की सिर्फ री-रजिस्ट्रेशन फीस में इजाफा किया जाएगा। फिटनेस सर्टिफिकेट पाने की फीस में कंपनी कोई बढ़ोतरी नहीं करेगी। इसके अलावा दोपहिया और तिपहिया वाहनों की रिन्युअल फीस 2,000 से 3,000 रुपये हो सकती है। वहीं, फोर व्हीलर की मौजूदा फीस 600 रुपये से बढ़कर 15,000 रुपये हो सकती है। बता दें, नया पंजीकरण निजी वाहनों पर पांच साल के लिए वैध रहता है।

    इसके अलावा नए प्रस्ताव के मुताबिक 15 साल से अधिक पुराने ट्रक या बस के फिटनेस टेस्ट की फीस 200 रुपये से बढ़कर 25 हजार रुपये हो सकती है। वहीं, कैब और मिनीट्रक के लिए ये फीस 15 हजार से 20 हजार रुपये हो सकती है। कमर्शियल वाहनों के लिए फिटनेस टेस्ट कराना हर साल करवाना अनिवार्य है। कहा जा रहा है रोड ट्रांसपोर्ट मंत्रालय ने यह सुझाव दिया है कि सिर्फ वाहन सड़क पर चलने में फिट है या नहीं, इसका फैसला सिर्फ फिटनेस टेस्ट के जरिए किया जाएगा, ना कि वाहन की उम्र से।

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