नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की वजह से बहुत से लोग अपनी बाइक में फ्यूल ट्यूनिंग करवाते हैं। ऐसा करने से फ्यूल टैंक से इंजन तक कम मात्र में पेट्रोल पहुंचता है, जिससे ईंधन की खपत कम होती है। इससे ईंधन की बचत तो होती ही है, साथ ही बाइक या स्कूटर की माइलेज भी बढ़ जाती है। लोगों को लगता है कि ऐसा करके प्रति किलोमीटर बहुत से रुपये बचाए जा सकते हैं।

लेकिन क्या आपको पता है, ईंधन को बचाने की तरकीब से आपकी गाड़ी को बहुत नुकसान पहुंचता है। इससे ड्राइव करने में तो परेशानी आती ही है, साथ ही इंजन पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। तो चलिए जानते हैं कि फ्यूल ट्यूनिंग करवाने के क्या नुकसान हैं।

स्टार्ट करने में परेशानी

फ्यूल ट्यूनिंग की वजह से कार्बोरेटर को ट्यून किया जाता है, जिससे इंजन तक उतनी मात्रा में ही ईंधन को पहुंचाया जाता है, जितने में इसे ठीक-ठाक कंडीशन में चलाया जा सके। इससे सबसे पहली परेशानी इसे स्टार्ट करने में होती है। खासकर ठंड के मौसम में रातभर गैराज में खड़ी बाइक को स्टार्ट करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

बार-बार एक्सेलरेटर लेना

फ्यूल ट्यूनिंग का एक और भी नुकसान है, जो अक्सर जाम में फंसे होने की स्थिति में परेशान करती है। कार्बोरेटर को ट्यून किए जाने की वजह से फ्यूल पाइप में बहुत कम ईंधन जाता है, जिससे गाड़ी को एक जगह पर स्टार्ट रखने या जाम जैसी स्थिति में स्लो चलाने की स्थिति में बार-बार एक्सेलरेटर करना पड़ता है। अगर आपने ऐसा नहीं किया तो आपकी गाड़ी बार-बार बंद हो जाएगी। यह स्थिति आपको परेशान कर सकती है।

इंजन का सीज होना

फ्यूल ट्यूनिंग का सबसे बुरा प्रभाव इंजन पर पड़ता है और जिसका असर कम इंजन दक्षता के तौर पर दिखाई पड़ता है। कार्बोरेटर को सही मानक पर ट्यून करने से आपकी बाइक के बेहतर प्रदर्शन में मदद मिल सकती है। वहीं, इस ट्यून को कम करने पर बाइक ठीक से परफॉर्म नहीं कर पाती और इस वजह से इंजन गर्म हो जाता है। अगर ऐसा लंबे समय तक चलता रहो तो इंजन के सीज होने का खतरा भी बना रहता है।

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Edited By: Sonali Singh

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