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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 07, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

केदारनाथ धाम में धूमधाम से मना अन्नकूट मेला

By Sunil NegiEdited By:
Published: Mon, 07 Aug 2017 09:26 PM (IST)Updated: Mon, 07 Aug 2017 10:42 PM (IST)

केदारनाथ में भतूज मेले में पूरी रात भक्तों ने शिवलिंग के दर्शन किए। रक्षाबंधन से एक दिन पहले मध्य रात्रि ...और पढ़ें

केदारनाथ धाम में धूमधाम से मना अन्नकूट मेला
केदारनाथ धाम में धूमधाम से मना अन्नकूट मेला

रुद्रप्रयाग, [जेएनएन]: विश्व प्रसिद्ध धाम केदारनाथ में भतूज मेले में पूरी रात भक्तों ने शिवलिंग के दर्शन किए। रक्षाबंधन से एक दिन पहले रविवार को मध्य रात्रि से मेले का आयोजन शुरू हुआ, जो सोमवार तड़के चार बजे तक चलता रहा। पूरी रात भोले बाबा के दर्शन भक्तों ने किए। वहीं विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी समेत ऊखीमठ शिव मंदिर में भी पौराणिक परंपराओं के अनुसार भतूज मेले धूमधाम से मनाया गया।

 प्रतिवर्ष रक्षाबंधन से एक दिन पहले केदारनाथ मंदिर में अन्नकूट मेला (भतूज) का आयोजन होता है। रविवार रात्रि को भतूज मेले में सर्वप्रथम केदारनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने भगवान शिव के स्वयंभू लिंग की विशेष पूजा-अर्चना की, इसके पश्चात नए अनाज झंगोंरा, चावल, कौंणी आदि के लेप लगाकर स्वयंभू लिंग का श्रृंगार  किया।

भोले बाबा के अलौकिक श्रृंगार के ही भक्त दर्शन करते हैं। रात्रि लगभग 12 बजे से भक्तों ने भोले बाबा के इस रूप के दर्शन किए, जो सबेरे लगभग पांच बजे तक चलता रहा। इसके बाद भगवान को लगाया गए अनाज के इस लेप को यहां से हटाकर मंदिर के पास स्वच्छ स्थान पर विसर्जित किया गया। मंदिर समिति के कर्मचारी ने मंदिर की साफ सफाई करने के उपरांत ही सोमवार को सुबह भगवान की नित्य पूजा-अर्चना की गई। 

 

मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि अन्नकूट मेला धूमधाम से मनाया गया। पूरी रात भक्तों ने केदार बाबा के दर्शन किए। वहीं इस मेले को लेकर मान्यता है कि नए अनाज में पाए जाने वाले विष को भोले बाबा स्वयं ग्रहण करते हैं। इस त्यौहार में विशेषकर स्थानीय लोग भाग लेते हैं, वहीं विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, कोलेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भी अन्नकूट मेला धूमधाम से मनाया गया।

 

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