यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 02, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड: ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल, केंद्र सरकार पर जमकर बोला हल्ला
आज ट्रेड यूनियनों की केंद्र की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल का यहां आंशिक असर है। राज्य कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल नहीं थे।

देहरादून, [जेएनएन]: श्रम कानून में बदलाव, विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और रोड सेफ्टी बिल के खिलाफ ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार पर जमकर हल्ला बोला। देहरादून में यूनियनों ने गांधी पार्क में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और घंटाघर तक सांकेतिक रैली भी निकाली। इसके अलावा हड़ताल में शामिल विभिन्न यूनियनों ने अपने-अपने कार्यालयों में भी प्रदर्शन किया। यूनियनों ने हड़ताल पूरी तरह सफल होने का दावा भी किया है।
गांधी पार्क में इंटक के प्रदेश अध्यक्ष एवं डोईवाला विधायक हीरा सिंह बिष्ट ने कहा कि केंद्र नीतियां श्रमिकों को और कमजोर करने की साजिश है, जिससे पूंजीपतियों को ज्यादा मुनाफा हो। रोड सेफ्टी बिल हो या बैंकों का विलय कर्मचारियों के हितों पर कुठराघात है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केंद्र की इन नीतियों का हर स्तर पर विरोध होगा।
संयुक्त ट्रेड यूनियंस समन्वय समिति के प्रांतीय संयोजक वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि केंद्र की नीतियां पूरी तरह श्रमिक विरोधी हैं। श्रमिकों को मजबूत करने के बजाय सरकार और कमजोर करने में जुटी है। पूंजीपतियों और उद्योगपतियों के लिए ही केंद्र सरकार काम कर रही है। श्रम कानून में संशोधन भी इसीलिए किया जा रहा है। संसद में विचाराधीन सड़क सुरक्षा बिल एक काला कानून है, जिसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। इस कानून के लागू होने से किराया बढ़ेगा और छोटे व्यवसायियों, चालकों, परिचालकों, मैकेनिकों के सामने संकट खड़ा हो जाएगा।

प्रदर्शन में इंटक के महासचिव एपी अमोली, उत्तराखंड बैंक इंप्लाइज यूनियन के महासचिव जगमोहन मेंदीरत्ता, उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के प्रदेश महासचिव रवि पचैारी, एटक नेता समर भंडारी, अशोक शर्मा, इंटक जिलाध्यक्ष धीरज भंडारी, बीईएफआइ के कार्यकारिणी सदस्य यर्शाक बुटोला, चित्रा गुप्ता, सीपी नैथानी, धीरज भंडारी, लेखराज, विनोद थापा, दीपक गौड़, मनजीत सिंह आदि मौजूद शामिल रहे।

उत्तराखंड: ट्रेड यूनियनों की हड़ताल, देखें तस्वीरें
ये हुए हड़ताल में शामिल
इंटक, सीटू, एटक, एक्टू, उत्तराखंड बैंक इंप्लाइज यूनियन, एआइडीईएफ, आइएनडीडब्ल्यूएफ, केंद्रीय कर्मचारी कामगार महासंघ, उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन, बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक की एआइबीईए, एआइबीओसी, एआइबीओए, बीईएफआइ, आइएनबीइसी, आइएनबीओसी, कर्मचारी संगठन गढ़वाल मंडल विकास निगम, बिजली कर्मचारी संघ, बिजली कर्मचारी संघ के अलावा रक्षा अनुसंधान, आयुध निर्माणी, एमईएस, डाकघर, आयकर, परिवहन, औद्योगिक संस्थानों, बीमा, होटल वर्कर, चाय बागान आदि के संगठनों ने हड़ताल में हिस्सा लिया।
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ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगें
-न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए
-ठेकेदारी प्रथा बंद हो और श्रमिकों को नियमित किया जाए
-रेल, रक्षा, बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश पर पूरी तरह रोक लगे
-रोड सेफ्टी बिल वापस लिया जाए
-ग्रेच्युटी का भुगतान 45 दिन प्रतिवर्ष के हिसाब से हो
-सभी श्रमिकों के लिए पेंशन सुनिश्चित की जाए
-महंगाई पर रोक लगाने के लिए ठोस नीति बनाई जाए
-सरकारी बैंकों के एनपीए के सात लाख करोड़ रुपये की वसूली हो और डिफाल्टरों के नाम प्रकाशित किए जाएं
-चाय बागान की भूमि पर श्रमिकों को मालिकाना हक दिया जाए
-श्रम कानून सख्ती से लागू हों और श्रमिक विरोधी संशोधनों को वापस लिया जाए
-आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा कार्यकत्री, भोजनमाता, ग्राम प्रहरी आदि को न्यूनतम वेतन देने के साथ राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए
-केंद्र और राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन नीति को बहाल किया जाए

हड़ताल को नैतिक समर्थन
अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ ने देशव्यापी हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया। संघ के परिमंडलीय अध्यक्ष बीडी भट्ट ने कहा कि केंद्र सरकार सभी डाक कर्मियों को कैडर रिव्यू का लाभ दिया जाए, अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की पांच फीसद की सीमा को समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं किया तो बेमियादी हड़ताल की जाएगी।