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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब गरीब बच्चों को मिलेगा भरपेट भोजन और शिक्षा

By Sunil NegiEdited By:
Published: Thu, 04 May 2017 04:06 PM (IST)Updated: Fri, 05 May 2017 06:00 AM (IST)

केंद्र सरकार की ओर से गरीबी रेखा के नीचे आने वाले बच्चों को 'स्पांसरशिप' योजना के तहत दो-दो हजार रुपये ...और पढ़ें

अब गरीब बच्चों को मिलेगा भरपेट भोजन और शिक्षा
अब गरीब बच्चों को मिलेगा भरपेट भोजन और शिक्षा

देहरादून, [जेएनएन]: गरीब बच्चों को भरपेट भोजन व शिक्षा के लिए सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। केंद्र सरकार की ओर से गरीबी रेखा के नीचे आने वाले बच्चों को 'स्पांसरशिप' योजना के तहत दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। जिससे वह अपने भोजन व शिक्षा की व्यवस्था कर सकें। खास बात ये है कि इस योजना का लाभ बच्चे अपने घर में रहकर भी उठा सकते हैं।

केंद्र सरकार से निर्देश जारी होने के बाद समाज कल्याण विभाग ने इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम (आइसीपीएस) के तहत राज्य में बच्चों का सर्वे भी शुरू कर दिया है। योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं परिवारों के बच्चों को दिया जाएगा जिनकी शहरी क्षेत्र में मासिक आय ढ़ाई हजार रुपये व ग्रामीण क्षेत्र में दो हजार रुपये महीने तक है।

निदेशालय ने प्रत्येक जिले में जिला प्रोबेशन अधिकारियों की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। जिसमें चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों को भी शामिल किया गया है। यह समिति ही स्पांसरशिप योजना में बाल बच्चों को आर्थिक मदद दिलाएगी। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि यह योजना अशिक्षा व कुपोषण की लड़ाई में कारगर साबित होगी। 

सभी बच्चों को मिल सकेगा लाभ

स्पांसरशिप योजना के तहत समाज कल्याण निदेशालय ने सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अच्छी बात ये है कि इस योजना से गरीब परिवार के सभी बच्चे लाभान्वित हो सकेंगे। 

संरक्षण गृह में कम होगी संख्या

निदेशालय अब तक गरीब व अनाथ बच्चों को बाल संरक्षण गृह में रखकर उनका भरन-पोषण करता है। लेकिन, इस योजना के शुरू होने से संरक्षण गृहों में बच्चों की संख्या कम होगी। 

तीन लाख बीपीएल परिवार

प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की बात करें तो यहां तीन लाख बीपीएल परिवार निवास करते हैं, जबकि 1.90 लाख परिवार अंत्योदय की श्रेणी में आते हैं।

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