यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Snake world: चीन के लिए भारत से हो रही दोमुंहे सांपों की तस्करी
पड़ोसी देश चीन में सेंडबोआ (दो मुंहा) सांप की मांग बढऩे के साथ ही भारत-नेपाल सीमा पर इसकी तस्करी भी तेज हो चली है।

श्रावस्ती (जेएनएन)। भारत के सांपों की दुनिया में अपनी अनोखी पहचान रखने वाला सेंडबोआ (दो मुंहा) सांप इन दिनों संकट में आ गया है। अचानक इसकी मांग बढ़ने से इसकी तस्करी होने लगी है। इसके चलते इसके अस्तित्व पर संकट है। पड़ोसी देश चीन में सेंडबोआ की मांग बढऩे से भारत-नेपाल सीमा पर इसकी तस्करी तेज है। नेपा सीमा से सटे जंगलों में सांप तस्करों की सक्रियता तेज है। बरसात का मौसम इन तस्करों के लिए मुफीद है। बिलों बरसात के पानी के बिलों में घुसने से सांप बाहर निकल आते हैं, जिससे इन्हें पकडऩे में आसानी रहती है। इसकी कीमत वजन पर निर्भर होती है। एक किलो वजन के सांप की कीमत एक करोड़ रुपये तक होती है।
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दो मुंहा सांप
श्रावस्ती जिले के सोहेलवा जंगल में आज एक ऐसा सांप मिला है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 1.5 करोड़ रुपये है। दुर्लभ प्रजाति के इस सेंडबोआ सांप को भारत से तस्करी कर नेपाल ले जाया जा रहा था। सुनहरे रंग के सुस्त रफ्तार वाले इस सांप की तस्करी इस इलाके में जोरों से की जा रही है। इस सांप की खास बात यह है कि इस सांप की पुंछ का आकार ही ऐसा होता है, जो मुंह की तरह नजर आता है। इस कारण यह देखने में दो मुंहा सांप लगता है। जानकारों के अनुसार, इन सांपों की तस्करी बड़े पैमाने पर की जा रही है। नेपाल के रास्ते इन सांपों को चीन और इंडोनेशिया भेजा जाता है। इसके अलावा देश के पश्चिमी बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी इनकी काफी मांग है।
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बनती नशीली की दवाएं
इन सांपों को जिंदा पकड़ कर शिकारी इसे ऊंची कीमत पर नेपाल में बेचते हैं, जहां से तस्कर इसे चीन और इंडोनेशिया ले जाते हैं। इन सांपों की खाल व हड्डियों से बने उत्पादों की मांग अचानक काफी बढ़ गई है। इस सांप का उपयोग एड्स, कैंसर और मिर्गी और सेक्स पॉवर की दवाओं को बनाने में किया जाता है। इसके अलावा इन सांपों का उपयोग नशीली दवाओं को बनाने में किया जाता है।
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जहरीला नहीं सेंडबोआ
मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. सरवर आलम का कहना है कि सेंडबोआ सांप जहरीला नहीं होता है। शांत प्रवृति का यह सांप मोटा होने के कारण धीमी गति से चलता है। इसलिए इसे पकडऩा आसान है। इसकी औसत उम्र 15-20 साल होती है। प्रभागीय वनाधिकारी बलरामपुर कर्ण सिंह गौतम ने कहा कि सांपों एवं अन्य जंगली जानवरों की सुरक्षा को लेकर विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को अलर्ट किया जा चुका है। जंगल क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है। सीमा पर एसएसबी के जवान भी अलर्ट हैं।
