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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दोनों पक्षों के धार्मिक लोग ही करवा सकते अयोध्या मामले में सुलह-समझौता

By Nawal MishraEdited By:
Published: Tue, 21 Mar 2017 06:04 PM (IST)Updated: Tue, 21 Mar 2017 10:37 PM (IST)

शीर्ष कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद सहमति से सुलझाने के सवाल पर सपा, रालोद और कांग्रेस ने अच्छी पहल बताया है। ...और पढ़ें

दोनों पक्षों के धार्मिक लोग ही करवा सकते अयोध्या मामले में सुलह-समझौता
दोनों पक्षों के धार्मिक लोग ही करवा सकते अयोध्या मामले में सुलह-समझौता

लखनऊ। ( जेएनएन)। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के सवाल पर ज्यादातर लोगों ने इसे अच्छी पहल करार दिया। अयोध्या में दोनों पक्षों से जुड़े पक्षकार सहमत नजर आए। उनका कहना है कि समझौते के प्रयास पहले से ही चल रहे हैं। इससे इतर विहिप संसद में कानून बनाकर राम मंदिर बनवाने की बात कह रही है। समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और कांग्रेस ने भी कोर्ट की सलाह का स्वात किया है। सपा मानती है कि दोनों पक्षों के धार्मिक लोग ही समझौता करवा सकते हैं। 

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धार्मिक लोग ही करवा सकते समझौता 
रामपुर में सपा नेता आजम खां ने कहा कि यह एक अच्छी पहल है। अच्छी बात यह है कि धार्मिक लोग और यूपी के सीएम आदित्‍यनाथ योगी के समय इसकी शुरुआत हो रही है। धार्मिक लोग ही समझौता करवा सकते हैं। आजम ने उलेमा काउंसिल, दिल्ली के शाही इमाम, ओवैसी और बरेली के तौकीर रजा खां पर तंज कसते हुए कहा कि इस मसले पर इनके साथ बात होनी चाहिए। इनकी इस्लामिक पालिटिकल पार्टी हैं तो यह बात करें। अगर ये लोग तैयार हैं तो जाहिर है कि हिन्दुस्तान के लोगों को कोई परेशानी नहीं है। कहा कि यही वो उलेमा हैं जिन्हें हिन्दुस्तान और बीजेपी जानती है। ये लोग बीजेपी के करीब भी हैं और इनके लिए उन्होने काम भी किया है। इनके बीच अगर समझौता होता है तो विचार करेंगे।
कांग्रेस और रालोद ने किया स्वागत
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष व मीडिया इंचार्ज सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रकरण का दोनों पक्षों को मिलकर हल निकाल लेना चाहिए। कांग्रेस का शुरू से ही मानना था कि इस मसले का हल आपसी सहमति से करना ही बेहतर है। टकराव समाप्त कर आपसी सौहार्द को बढ़ाने का सच्चे मन से प्रयास हो। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष डा. मसूद अहमद का कहना है कि आपस में वार्ता के जरिए समस्या समाधान से बेहतर कुछ नहीं होगा। दोनों पक्षों को मिलजुल कर  रास्ता निकालना चाहिए ताकि किसी पक्ष की न हार हो न जीत हो। ऐसा संभव होता है, तो राजनीतिक लाभ उठाने वालों को सबक मिलेगा। 

अयोध्या राम की जन्मस्थली 

राम मंदिर निर्माण पर आपसी बातचीत पर सुलह को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पहल का दोनों पक्षों ने स्वागत किया है। निर्मोही अखाडा ने कहा कि अयोध्या भगवन राम की जन्मस्थली है। मुस्लिम अपना दावा छोड़े। अयोध्या में विवादित ढांचे के मुद्दई हाजी महबूब ने कहा कि हम पहले से चाह रहे थे दोनों पक्ष बैठकर बातचीत करे ।

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विहिप अड़ाती सुलह में टांग 

अयोध्या मामले में दूसरे पक्ष के मुद्दई इक़बाल अंसारी ने इस मामले को उलझाने का आरोप विहिप पर लगाया। उन्होंने कहा कि विहिप सुलह में टांग अड़ाती है । मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करता है । बाबरी मस्जिद के मुद्दई व मरहूम हाशिम अंसारी के पुत्र इक़बाल अंसारी है ।

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बातचीत का औचित्य नहीं

विहिप के प्रांतीय मिडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि बिना संसद में कानून बनाए मंदिर निर्माण नहीं हो सकता है। संसद में कानून बनाकर ही अयोध्या में राम मंदिर बनवाया जा सकता है। बातचीत का कोई औचित्य नहीं है। हिंदूवादी सरकार ही मंदिर बना सकती है जो वर्तमान में मौजूद है।

सुलह में कुछ लोग बाधक

आचार्य सत्येंद्र दास का बयान ने सुप्रीम कोर्ट की पहल को प्रशंसनीय बताया है। उन्होंने कहा कि पहले से ही सुलह की कोशिश चल रही है। कुछ लोग नहीं चाहते दोनों पक्षों में हो सुलह समझौता हो। आचार्य सत्येंद्र दास रामलला के मुख्यपुजारी है।

सुप्रीमकोर्ट निर्देश नहीं दे सकती 

रामलला विराजमान के वकील मदनमोहन पाण्डेय ने कहा कि हाईकोर्ट के 3 जजो ने माना मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर रामलला का है। मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर जमीन छोड़ना संभव नहीं है। मामले में सुप्रीमकोर्ट निर्देश नहीं दे सकती । केवल पहल कर सकती है। दूसरे पक्ष के लिए विकल्प तलाशा जाना चाहिए।