यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 11, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
राजधानी लखनऊ के बस स्टेशनों पर भी सुरक्षा प्रभु भरोसे
बुधवार को अकालतख्त ट्रेन में बम बरामद होने के बाद भी यहां किसी तरह की पड़ताल तक नहीं की गई।

लखनऊ (जागरण संवाददाता)। सैकड़ों बसें और इनमें सफर करने वाले हजारों यात्री। फिर भी सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कुछ सीसीटीवी कैमरे, मेटल डिटेक्टर तक नहीं। यह हाल है राजधानी में परिवहन निगम के चारबाग और कैसरबाग बस स्टेशनों का। हां, पुलिस चौकी जरूर है। ट्रेन में बम बरामद होने के बाद भी यहां किसी तरह की पड़ताल तक नहीं की गई।
चारबाग बस स्टेशन: यहां परिसर में भीड़ खूब रहती है लेकिन जांच करने वाला कोई नहीं। बिना जांच कोई भी कहीं भी घूम फिर सकता है।
कैसरबाग बस अड्डा: यहां परिसर में चौकी है। पुलिसकर्मी दिखते तो हैं लेकिन सुरक्षा को लेकर कभी भी यात्रियों की पड़ताल करते नहीं दिखते।
अंडरग्राउंड पार्किंग में नहीं लगा कैमरा: सुरक्षा को देखते हुए कैसरबाग बस स्टेशन की अंडरग्राउंड पार्किंग में तत्काल कैमरा लगाने के निर्देश बीती दो अगस्त को परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह और प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला ने ठेकेदार को दिये थे। अफसरों की ओर से लिखापढ़ी भी की गई है, लेकिन अभी तक कैमरे लगे नहीं हैं। पार्किंग में खड़ी होने वाली गाड़ियों की भी कभी चेकिंग नहीं की जाती है।
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बिना पड़ताल सौ रुपये में थाम लेते हैं डिब्बा परिचालक: बसों में चालक परिचालक 100 रुपये की लालच में सिर्फ मोबाइल नंबर लेकर कोई भी डिब्बा तय स्थान तक पहुंचाने को तैयार हो जाते हैं। भले ही ऐसे डिब्बे यात्रियों की जान जोखिम में डालते हों। चारबाग हो या फिर कैसरबाग बस स्टेशन परिसर, परिचालकों को डिब्बा थमाते कभी भी देखा जा सकता है। अधिकारियों ने ऐसे कर्मियों पर कार्रवाई करने को कहा भी पर आज तक इनके रवैये में बदलाव नहीं आया है।
