यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 27, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आंखों को ऐसे दें आराम
आजकल ऑफिस में ज्यादातर काम कंप्यूटर पर ही होते हैं। बहुत से लोगों को अपनी जॉब के सिलसिले में हर ...और पढ़ें

नई दिल्ली। आजकल ऑफिस में ज्यादातर काम कंप्यूटर पर ही होते हैं। बहुत से लोगों को अपनी जॉब के सिलसिले में हर दिन कई घंटे तक कंप्यूटर स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रहना पड़ता है। इसके बाद जब वे घर पहुंचते हैं, तो वहां भी टैबलेट या टीवी स्क्रीन से चिपक जाते हैं। इनमें से बहुत से लोगों को ऑफिस में कम रोशनी में या ऐसी जगह काम करना पड़ता है, जहां रोशनी आने का एंगल सही नहीं होता। ऐसे ज्यादातर लोग अक्सर आंखों के बहुत थक जाने या सिरदर्द की शिकायत करते हैं।
असल में इस तरह से आपका शरीर आपको यह संकेत देता है कि आपकी आंखों को आराम की जरूरत है, इसलिए इन संकेतों को आपको बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आंखें कुदरत की ऐसी नियामत हैं जिन्हें आपको बहुत सहेज कर रखना होगा।
हाल की कई रिपोर्ट्स से यह पता चला है कि कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले करीब 80 फीसदी लोगों में आई स्ट्रेन के लक्षण पाए जाते हैं। यह काफी चिंताजनक बात है, क्योंकि इससे किसी व्यक्ति की कार्यक्षमता और उसके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। आंखों की देखभाल से जुड़े पेशेवर लोग आई स्ट्रेन के लिए एस्थेनोपिया शब्द का इस्तेमाल करते हैं। दृष्टि विज्ञान के शब्दकोश में एस्थेनोपिया का मतलब असहजता, दर्द और (उत्तेजित) परेशान करने वाली दृष्टि की शिकायत से है।
नियम 20-20-20
20-20-20 नियम काफी प्रभावी है और इससे आई स्ट्रेन कम होता है। नियम यह है कि हर 20 मिनट के बाद स्क्रीन से अपनी नजरें हटाकर कम से कम 20 फीट की दूरी पर स्थित किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें। हालांकि, यह हर बार ब्रेक लेने के लिए यह ट्रैक करना थोड़ा मुश्किल है कि 20 मिनट कब होते हैं, खासकर तब आप जब काम में व्यस्त हों, इसलिए हमारा सुझाव है कि आप इसके लिए एक मुफ्त डाउनलोड होने वाले ऐप प्रोटेक्ट योर विजन का इस्तेमाल करें, जो आपको तय समय अंतराल पर ब्रेक लेने की याद दिलाता रहेगा। यही नहीं, आप यदि यह चाहते हैं कि आपके कंप्यूटर का स्क्रीन हर 20 मिनट के बाद अपने आप डार्क हो जाए, तो आप विंडोज के लिए फेडटॉप और मैक के लिए टाइमआउट एप का चुनाव कर सकते हैं। इसमें स्क्रीन अपने आप डार्क हो जाएगी और आपको किसी बटन पर क्लिक नहीं करना होगा।
अपने बैठने की अवस्था बदलें
आप कंप्यूटर स्क्रीन के सामने जिस तरीके से बैठते हैं वह आपकी आंखों के बहुत थक जाने, तनाव में आने (आई स्ट्रेन) की एक वजह होती है। इसलिए अपनी समस्या के किसी सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर समाधान तलाशने से पहले यह देख लें कि आपके बैठने की अवस्था सही है या नहीं। कई मामलों में स्क्रीन का डिस्प्ले आपकी आंखों के लेवल से ऊपर या नीचे होता है। यदि आपको स्क्रीन पर देखने के लिए अपनी गर्दन को उठाना या झुकाना पड़ता है तो इसका मतलब यह है कि आप अपनी आंखों को खुद ही स्ट्रेन दे रहे हैं। लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो स्क्रीन को अपनी आंखों के लेवल तक ले जाने के लिए किसी लैपटॉप स्टैंड का इस्तेमाल करें या उसे कुछ किताबों के ढेर पर रख दें। स्क्रीन यदि आपकी आंखों के लेवल से ऊपर है, तो अपनी कुर्सी को ऊंची कर आंखों को स्क्रीन के लेवल तक ले जाने की कोशिश करें।
नीली रोशनी कम करें
डिजिटल आई स्ट्रेन की एक बड़ी वजह नीली रोशनी भी होती है। अपने मॉनिटर को आई-फ्रेंडली रखने के लिए स्क्रीन की ब्राइटनेस और कन्ट्रास्ट सेटिंग में उपयुक्त बदलाव करें। एक विकल्प यह भी है कि एफ.एलयूएक्स का इस्तेमाल करें, जो मुफ्त में उपलब्ध प्रोग्राम है। एफ.एलयूएक्स को डाउनलोड करें और इसे अपने कंप्यूटर पर इंस्टाल करें। एफ.एलयूएक्स बैकग्राउंड में चलता रहता है और दिन में अलग-अलग रोशनी के मुताबिक आपके मॉनिटर के डिस्प्ले को एडजस्ट करता रहता है।
हार्डवेयर का भी सहारा लें
आंखों में स्ट्रेन कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि एंटी-ग्लेयर स्क्रीन वाले गैजेट खरीदें। इसके अलावा आप किसी ऑप्थलमोलॉजिस्ट के पास जाकर एक अच्छा एंटी-ग्लेयर चश्मा ले सकते हैं।
