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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भद्रकाल के चलते आज दोपहर तक नहीं बंधेगी राखी!

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Published: Fri, 08 Aug 2014 09:14 PM (GMT+05:30)Updated: Sun, 10 Aug 2014 05:31 AM (GMT+05:30)

हिंदू पंचांग के अनुसार रविवार दोपहर 1:38 तक भद्राकाल के दौरान न तो ठाकुर जी की कलाई पर राखी बांधी ...और पढ़ें

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वृंदावन [जासं]। हिंदू पंचांग के अनुसार रविवार दोपहर 1:38 तक भद्राकाल के दौरान न तो ठाकुर जी की कलाई पर राखी बांधी जा सकेगी और न ही बहनें भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। हालांकि पांडित्य कर्म करने वाले लोगों का कहना है कि इसके पुच्छ काल में सुबह 11:05 बजे के बाद राखी बांधी जा सकती है। इसी के चलते देश व दुनिया की बहनों की भेजी राखियां ठा. बांकेबिहारी जी की कलाई पर सुबह नहीं बंध पाएंगी। राखी बांधे जाने के लिए समय अभी तय नहीं हो पाया है।

हिंदू पंचांग में दर्शाए गए ग्रह नक्षत्रों का इस बार रक्षाबंधन पर विकट संयोग बना है। भद्राकाल होने के कारण लोग असमंजस की स्थिति में हैं। मान्यता है कि भद्रा योग के समय बहनें अगर भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं तो इसका शुभ फल प्राप्त नहीं होता।

पांडित्य कर्म करने वाले पं. जगदीश शर्मा बताते हैं कि भारतीय परंपरा के अनुसार भद्रा योग में दो कार्य ऐसे हैं जो संभव नहीं हैं। पहला होलिका दहन और दूसरा राखी। अगर भद्रा योग में राखी बांध भी दी जाए, तो यह शास्त्रों के नियम के विपरीत होगा। बांके बिहारी मंदिर में भद्राकाल को लेकर सेवायतों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। बताया गया कि मंदिर में सुबह राजभोग सेवा अधिकारी अलग हैं और शाम को शयनभोग सेवाधिकारी अलग। ऐसे में सुबह राजभोग सेवा अधिकारी ठाकुरजी की कलाई पर राखी बांधेंगे या शाम को राखी बांधी जाएगी, अभी तक तय नहीं हुआ है। मंदिर प्रबंध कमेटी भी असमंजस में हैं कि ऐसे में परंपरा और पर्व की रवायत पूरी करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा।

सेवायत आचार्य अनिल गोस्वामी ने बताया कि भद्राकाल की वजह से रक्षाबंधन के दिन सुबह बांकेबिहारी समेत अन्य देवालयों में ठाकुर जी सूनी कलाई में ही दर्शन देंगे।

द्वारिकाधीश मंदिर में भी मंथन

पाताल भद्रा योग को लेकर द्वारिकाधीश मंदिर में भी मंथन हो रहा है। मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि इस मसले पर शनिवार को विद्वजनों से विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मत बनाई जाएगी। आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार भद्रा योग में न तो होलिका दहन होता है और न राखी बांधने का योग। इस बार रक्षाबंधन पर जो योग दर्शाया गया है वह पाताल भद्रा योग है, इसका प्रभाव अधिक नहीं होता, इस काल के पुच्छ भाग में सुबह 11:05 बजे के बाद धन आगम योग बन रहा है, जिसमें राखी बांधी जाए तो कोई दोष नहीं होगा।

एक घंटा पाताल में रहेगी भद्रा

नक्षत्रीय ज्योतिष अनुसंधान केंद्र की ज्योतिषी शालिनी द्विवेदी ने बताया कि भद्रा काल रविवार दोपहर 1:38 तक है, लेकिन जो भाई-बहन अशक्त हैं या किसी कारणवश इस समय तक नहीं रुक सकते, वे सुबह 10:07 के बाद रक्षा सूत्र बांध सकते हैं। दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक आचार्य कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि भद्रा सुबह 10:05 से 11:05 बजे तक पाताल में विचरण करेगी। यह भद्रा का पुच्छ काल होगा।

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