यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
छह माह बाद फिर गर्माई आरोप-प्रत्यारोप की सियासत, सरकार पर हमले हुए तेज
गुरदासपुर उपचुनाव के चलते एक बार फिर पंजाब में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। आप, भाजपा और अकाली दल जमकर सरकार पर हमले बोल रहे हैं।

चंडीगढ़, [मनोज त्रिपाठी़]। विधानसभा चुनाव के छह माह बाद सियासी सन्नाटा टूटने के साथ ही सियासी दलों ने आरोप-प्रत्यारोप की सियासत तेज कर दी है। छह महीनों से विभिन्न मुद्दों पर सरकार के खिलाफ बोलने से परहेज करने वाले अकाली दल, भाजपा व आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर चौतरफा प्रहार शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के विदेश दौरे से शनिवार को लौटते ही आरोपों में घिर रही कांग्रेस के बचाव में कांग्रेसी नेताओं ने भी विपक्ष पर तीखे हमले करने शुरू कर दिए हैं।
सरकार के गठन के बाद अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने बयान दिया था कि अभी नई सरकार बनी है, सरकार को थोड़ा समय देना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने तमाम मुद्दों को लेकर सरकार का पक्ष लिया था कि अभी नई सरकार है। भाजपा ने भी आधिकारिक तौर पर एलान किया था कि पंजाब के भले के मुद्दों पर भाजपा कांग्रेस का साथ देगी।
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पहली बार विपक्ष में आई आम आदमी पार्टी ने भी किसानों के कर्ज, नशा व रोजगार जैसे तमाम मुद्दों को लेकर यही कहा था कि कुछ समय सरकार काम कर ले फिर देखते हैं। सरकार के गठन के बाद प्रदेश स्तर पर नशा व रेता माफिया का मुद्दा उठा। अकाली दल काफी समय तक इस मुद्दे पर सीधी बयानबाजी करने से बचता रहा। भाजपा भी तीन महीनों तक इस मुद्दे पर बयानबाजी से कतराती रही।
रेत खनन के ठेके में कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत के करीबियों के शामिल होने का मुद्दा आम आदमी पार्टी ने गरमाया। इसके बाद भाजपा भी इस मुद्दे में कूदी, लेकिन अकाली दल ने कांग्रेस पर सीधा प्रहार नहीं किया। जब मुद्दा सड़कों तक पहुंच गया और जांच आयोग का गठन कैप्टन ने कर दिया तो अकाली दल ने हल्की-फुल्की बयानबाजी करके पल्ला झाड़ लिया।
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इसी बीच स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान ही केबल माफिया का मुद्दा उठाया। कांग्रेसी विधायक सुखजिंदर रंधावा व अन्य विधायकों ने ट्रांसपोर्ट माफिया के खिलाफ कारवाई की मांग की तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह चुप रहे। सिद्धू ने लगातार तीन महीनों तक केबल माफिया का मुद्दा उठाया, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। ट्रांसपोर्ट माफिया पर कारवाई को लेकर नई ट्रांसपोर्ट बनानी शुरू कर दी गई और मुद्दा धीरे से कब गायब हो गया पता ही नहीं चला।
मुख्यमंत्री खुद तमाम मुद्दों की सियासत से बचते रहे और धीरे-धीरे कांग्रेसी विधायकों में ही सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ती गई। गुरदासपुर उपचुनाव की तरीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे सुखबीर से लेकर अन्य विपक्षी नेता वित्तीय संकट, नशे व किसानों के कर्ज माफी जैसे तमाम मुद्दों पर खुलकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। गुरदासपुर उप चुनाव 11 अक्टूबर को है। 23 दिनों में अभी आरोपों-प्रत्यारोपों को लेकर शुरू हुई सियासत का और तेज होना तय है।
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कुकर्मों का भेद खुलने से डरे अकाली: जाखड़
पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ कहते हैं कि अकाली अपने दस साल के कुकर्मों का भेद खुलने डर गए हैं। अकालियों के शासनकाल में लोगों व विरोधियों पर की गई ज्यादतियों, श्रीगुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी को लेकर कांग्रेस सरकार द्वारा आयोग गठित करके जांच करवाई जा रही है। उसे अकालियों की हवा खराब है। पुलिस ज्यादतियों के लिए जस्टिस महताब सिंह गिल आयोग व धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की जांच के लिए जस्टिस रणजीत सिंह आयोग पर भी अकाली अंगुलीं उठा रहे हैं। बेअदबी की घटनाओं में भी अकाली नेताओं का हाथ होने के करीब जांच पहुंच चुकी है। रिपोर्ट आने से पहले ही अकालियों को डर सताने लगा है।
सुखबीर अपनी करतूतों को छिपा रहे: कांग्रेस
कांग्रेसी नेता व विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा, एसएस सुखसरकारिया, हरप्रताप सिंह अजनाला, ब्रिंदरजीत सिंह पाहरा, तरसेम सिंह डीसी व धर्मबीर अग्निहोत्री ने शनिवार को अकाली दल पर प्रहार करते हुए कहा है कि सुखबीर अपनी दस साल की करतूतों को छिपाने के लिए सरकार पर उल्टे-सीधे आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि सुखबीर न तो नेता प्रतिपक्ष हैं और न उनके पास सरकार के कार्यकाल का आकलन करने का अधिकार है। पंजाब के लोगों ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया है।
