यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 28, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अमेरिका ने मोदी-शरीफ मुलाकात को सराहा
वाशिंगटन। अमेरिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच मुलाकात की सराहना की है। साथ ...और पढ़ें

वाशिंगटन। अमेरिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच मुलाकात की सराहना की है। साथ ही कहा कि वह दो पड़ोसियों के बीच संबंधों के सुधार के बारे में सावधानीपूर्वक उम्मीद बांधे हुए है।
नई दिल्ली में दो दक्षिण एशियाई नेताओं के बीच मुलाकात के बारे में पूछ जाने पर ओबामा प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह [मोदी-शरीफ मुलाकात] एक सकारात्मक संकेत हो सकता है लेकिन हम सचेत भी हैं। उन्होंने कहा कि शरीफ ने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के आमंत्रण को स्वीकार किया। ये कई सालों में इस प्रकार की पहली यात्रा थी। जहां तक पुरानी बात है शरीफ ने 90 के दशक के आखिर में बतौर प्रधानमंत्री भारत की यात्रा की थी, तब भाजपा सत्ता में थी। तब दोनों देशों के रिश्तों में काफी सुधार आया था। अधिकारी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी की शांति पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली-लाहौर बस सेवा उसमें एक थी।
मोदी का स्वागत करेगा अमेरिका : कैरी
अमेरिकी विदेश मंत्री जान केरी ने कहा कि ओबामा प्रशासन नए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका में स्वागत करने की प्रतीक्षा कर रहा है। केरी ने अमेरिका में भारतीय राजदूत जयशंकर से मुलाकात में मोदी के संबंध में ये बात कही। मोदी के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद केरी की शीर्ष भारतीय राजनयिक से ये पहली मुलाकात थी।
पाक मीडिया उलझन में :
इस्लामाबाद। पाकिस्तानी मीडिया बुधवार को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भारत यात्रा और नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के परिणाम को लेकर उलझन में दिखा। इसकी झलक पाकिस्तान के प्रमुख अखबारों के संपादकीय में दिखाई दी।
- क्या वास्तव में पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य रूप से आगे बढ़ाने में मोदी की दिलचस्पी है? मोदी ने चतुराई से शरीफ की मेजबानी कर खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सद्भावना पुरुष के रूप में पेश किया है।
[डॉन अखबार]
- शरीफ की दिल्ली यात्रा 'एक चतुर राजनीतिक कदम' थी। अगर वास्तव में कोई प्रगति होने वाली है तो उसे प्रतीकवाद से परे होना चाहिए।
[द नेशन]
- प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को कश्मीर समस्या पर किसी भी तरह की सौदेबाजी से दूर रहना होगा।
[नवाए वक्त, उर्दू अखबार]
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