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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 07, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भारत-इजरायल के बीच 13 हजार करोड़ का सैन्य खरीद समझौता

By Mohit TanwarEdited By:
Published: Fri, 07 Apr 2017 07:58 PM (IST)Updated: Fri, 07 Apr 2017 08:11 PM (IST)

इजरायल भारत को उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति करेगा।

भारत-इजरायल के बीच 13 हजार करोड़ का सैन्य खरीद समझौता
भारत-इजरायल के बीच 13 हजार करोड़ का सैन्य खरीद समझौता

यरुशलम, प्रेट्र। भारत और इजरायल के बीच रक्षा संबंधों ने नई ऊंचाई को छू लिया है। दोनों देशों ने दो अरब डॉलर (करीब 13 हजार करोड़ रुपये) का सैन्य खरीद समझौता किया है। इसे इजरायल के रक्षा उद्योग का सबसे बड़ा खरीद समझौता माना जा रहा है। इसके तहत इजरायल भारत को उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति करेगा।

इजरायल की सरकारी कंपनी इजरायल एयरोस्पेस इंस्डस्ट्रीज (आइएआइ) भारतीय सेना को सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली (एमआरएसएएम) देगी। आइएआइ ने बताया कि भारत के पहले स्वदेश निर्मित विमान वाहक पोत के लिए लंबी दूरी की मिसाइल रक्षा प्रणाली (एलआरएसएएम) की आपूर्ति भी की जाएगी। आइएआइ के साथ 1.6 अरब डॉलर (करीब 10,290 करोड़ रुपये) का सौदा हुआ है। शेष समझौता अन्य सरकारी कंपनी राफेल के साथ किया गया है। राफेल इस प्रणाली के अन्य अवयव मुहैया कराएगी।

आइएआइ के सीईओ जोसेफ वीस ने कहा, 'ये करार आइएआइ की क्षमता और उन्नत तकनीक पर भारत सरकार का भरोसा दिखाते हैं। इन तकनीक को भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल के तहत हमारे स्थानीय सहयोगियों के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है।'

इजरायल के राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन ने वीस को इस ऐतिहासिक समझौते के लिए बधाई दी। अपने भारत दौरे पर रिवलिन ने भारतीय नेताओं से इस समझौते पर चर्चा की थी। मेक इन इंडिया पहल का समर्थन करते हुए तकनीक साझा करने और भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम बनाने की इजरायल की इच्छा को भारत सरकार ने सकारात्मक तरीके से स्वीकारा है।

बताया जा रहा है कि एमआरएसएएम की तकनीक का विकास आइएआइ ने भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर किया है। इसमें राफेल और आइएआइ की ईएलटीए ने सहयोग किया। भारतीय कंपनियां बीईएल और एल एंड टी भी परियोजना का हिस्सा थीं।

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