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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 12, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रैगिंग करने वाला रोकेगा रैगिंग

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Published: Thu, 12 Dec 2013 02:37 AM (GMT+05:30)Updated: Thu, 12 Dec 2013 03:46 AM (GMT+05:30)

कालेज में रैगिंग कर छात्र से मारपीट करने के मामले में आरोपी युवक अब उसी कालेज में जाकर एंटी-रैगिंग कैंपेन ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, [

पवन कुमार]।

कालेज में रैगिंग कर छात्र से मारपीट करने के मामले में आरोपी युवक अब उसी कालेज में जाकर एंटी-रैगिंग कैंपेन चलाएगा और छात्रों को कहेगा कि रैगिंग मत करो, यह एक अपराध है। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 वर्ष पूर्व रामजस कालेज में रैगिंग के दौरान छात्र से मारपीट करने के एक मामले में आरोपी सुधीर कुमार शर्मा को देते हुए उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद कर दिया है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जेआर मिढा ने यह फैसला सुधीर द्वारा दायर उस याचिका का निपटारा करते हुए दिया है, जिसमें उसने समझौते के आधार पर उस पर दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियान के माध्यम से छात्रों को यह बताया जाए कि नए छात्रों की मनोदशा पर रैगिंग का क्या बुरा प्रभाव पड़ता है और किस तरह छात्र आत्महत्या तक करने का कदम उठा लेते हैं? इतना ही नहीं रै¨गंग के संबंध में बने कानून के बारे में भी छात्रों को जागरूक किया जाए, ताकि वह इस तरह की हरकत भविष्य में न करें। याचिकाकर्ता की इस मामले में मदद रामजस कालेज के प्रिंसीपल व मौरिस नगर थानाध्यक्ष करेंगे। इस कैंपेन के बाद अदालत में पुलिस द्वारा रिपोर्ट दायर की जाए।

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अदालत ने कहा कि सुधीर ने जो गलती की है, उसके खामियाजे के तौर पर उसे एंटी-रैगिंग कैंपेन के अतिरिक्त दो सप्ताह के भीतर एक यूनिट रक्तदान भी करना होगा। वहीं, आरोपी को 15 हजार रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कराने होंगे। यह पैसा उत्तराखंड में आई आपदा के पीड़ितों को पुनस्थापित करने में प्रयोग किया जाएगा।

पेश मामले में पुलिस ने छात्र सुधीर कुमार शर्मा के खिलाफ वर्ष 2002 में रामजस कालेज में रैगिंग करने के दौरान मारपीट करने का एक मामला दर्ज किया था। इस मामले में उसने प्राथमिकी रद करने की मांग की थी। उसका कहना था कि उसका शिकायतकर्ता से समझौता हो चुका है। सरकारी वकील एमपी सिंह ने कहा कि उनको प्राथमिकी दर्ज करने पर कोई आपत्ति नहीं है परंतु याचिकाकर्ता ने गलती की है। इसलिए उसे उसी के कालेज में रैगिंग के खिलाफ कैंपेन चलाने का निर्देश दिया जाए ताकि वह बाकी छात्रों को इसके दुष्परिणाम के बारे में सूचित कर सके।

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