यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 05, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शंकराचार्य ने सुनाई आजादी के आंदोलन की दास्तां
शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती ने एक बार फिर साई बाबा को मुसलमान बताया। कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि साई ...और पढ़ें

गाजीपुर [जासं]। शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती ने एक बार फिर साई बाबा को मुसलमान बताया। कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि साई ब्राह्माण थे लेकिन किताबों में लिखा है कि वह मुस्लिम थे। साई बाबा काप्रचार धारावाहिकों के माध्यम से हुआ है। अभिनय करवाकर उनका प्रचार किया गया है।
ज्योतिष व द्वारिका शारदा पीठाधीश्र्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने प्रवचन के दौरान अपनी पुरानी यादें भी लोगों से साझा की। उन्होंने कहा कि जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो का नारा दिया तो युवाओं ने अंग्रेजी हुकूमत का जमकर विरोध शुरू कर दिया। महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, अब्दुल कलाम आजाद आदि को जेल में बंद कर दिया गया।
उस समय वह बभनौली में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। उन्होंने सोचा कि वह भी कुछ करें। आजादी के योद्धाओं के साथ औडि़हार स्टेशन फूंक दिया। सैदपुर तहसील को ध्वस्त कर दिया। सैदपुर से औडि़हार के बीच में रास्ता काट दिया। तब रामपुर में अंग्रेज नादरसोल आया और उसने वशिष्ट सिंह की कुटिया में आग लगा दी। नादरसोल व पुलिस को जनता ने दौड़ा लिया। बाद में वह वाराणसी में पकड़े गए। देश आजाद हुआ और पंडित नेहरू जेल से बाहर आए और कहा कि शाबाश बलिया तो मन उदास हो गया।
उन्होंने कहा कि हम सब कुछ हासिल कर लें लेकिन जब तक धार्मिक नहीं बनते, सुख नहीं मिल सकता है। राजनेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे अपने हित के बारे में सोच रहे हैं आप के बारे में नहीं। उनका उद्देश्य केवल सत्ता में आना है। हम भारतीय संस्कृति को भूल चुके हैं। मुसलमान मदरसे में अपने बच्चों को इस्लाम और ईसाई बाइबिल से परिचित करा रहा है लेकिन हम हिंदू उन्हें गीता और उपनिषद का ज्ञान नहीं दे पा रहे हैं।
