यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
SIT तो संसद हमले को भी प्रायोजित बता रही थीः मणि
गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आरवीएस मणि, जिन्होंने इशरत जहां केस में गुजरात उच्च न्यायालय में दो हलफनामे दायर किए, ...और पढ़ें

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आरवीएस मणि, जिन्होंने इशरत जहां केस में गुजरात उच्च न्यायालय में दो हलफनामे दायर किए, ने यह दावा किया था कि हत्या की जांच के लिए गठित की गई एसआईटी ने उसे बताया था कि 26/11 का मुंबई आंतकी हमला और 13 दिसंबर को संसद पर हुआ आतंकी हमला "सत्ताधारी सरकार द्वारा करवाया गया था"।
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मणि जिन्होंने गृह मंत्रालय में अवर सचिव के रूप में 2009 शपथ-पत्र दायर किया था, ने तत्कालीन केंद्रीय शहरी विकास सचिव सुधीर कृष्णा को अदालत द्वारा नियुक्त एसआईटी के समक्ष 21 जून 2013 को अपने बयान के बारे में बताया था। कृष्णा को दिए अपने बयान में मणि ने कहा था कि गुजरात के गांधीनगर में बयान दर्ज कराने के दौरान, एसआईटी के आईजी सतीश चंद्र वर्मा ने उनसे कई सवाल किए थे जो उनके गृह मंत्रालय के कार्यकाल के दौरान कभी सामने नहीं आ सके। मणि के मुताबिक एसआईटी के आईजी सतीश चंद्र वर्मा ने उनसे ऐसे कई सवाल किए, जिनका उनसे आधिकारिक संबंध नहीं था।
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इसी दौरान वर्मा ने मणि से बताया कि 13 दिसंबर 2001 को संसद और 26/11 मुंबई में हुआ आतंकी हमला तत्कालीन सरकारों ने करवाया गया था। वर्मा के मुताबिक इसका मकसद आतंकवाद निरोधी कानून को मजबूत करना था। वर्मा ने बताया था कि 13 दिसंबर के संसद हमले के बाद पोटा कानून आया था जबकि 26/11 के मुंबई हमले के बाद यूपीए द्वारा संशोधन किया गया। मणि ने दावा किया था कि वर्मा ने कुछ कागजातों पर उन्हें हस्ताक्षर करने को मजबूर किया था जो कागजात पूरी तरह से झूठे थे। दूसरी ओर वर्मा ने इन बातों से पूरी तरह से इनकार किया है।
