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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 11, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मेडिकल की साझा परीक्षा का रास्ता फिर खुला

By anand rajEdited By:
Published: Mon, 11 Apr 2016 12:47 PM (GMT+05:30)Updated: Mon, 11 Apr 2016 07:49 PM (GMT+05:30)

सभी सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कालेजों में दाखिले के लिए एक ही राष्ट्रीय साझा प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) का रास्ता एक ...और पढ़ें

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सभी सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कालेजों में दाखिले के लिए एक ही राष्ट्रीय साझा प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) का रास्ता एक बार फिर से खुल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने वाले अपने ही पुराने फैसले को वापस ले लिया है। हालांकि, इसके लिए जिस तरह की तैयारियों की जरूरत है, उसे देखते हुए इस साल से इसके लागू हो पाने की संभावना बहुत कम है।

मेडिकल शिक्षा में जारी भ्रष्टाचार और छात्रों को होने वाली समस्याओं को दूर करने के लिहाज से सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला किया। शीर्ष अदालत की पांच जजों की संविधान पीठ ने मंगलवार को अपने जुलाई, 2013 के फैसले को वापस ले लिया। संविधान पीठ ने पिछले आदेश को निरस्त करते हुए कहा है, 'मामले की विस्तार से सुनवाई के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस मामले में दिए गए फैसले पर फिर से विचार की जरूरत है। साथ ही, जस्टिस अनिल आर दवे के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कहा है कि इस मौके पर हम इसके कारणों के विस्तार में नहीं जाएंगे ताकि इस मामले की आगे की सुनवाई प्रभावित नहीं हो।

इस आदेश का मतलब यह हुआ कि जुलाई, 2013 के फैसले के पहले वाली स्थिति फिर से लागू हो गई। यानी केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआइ) का इस परीक्षा का सभी कालेजों पर लागू होने का आदेश लागू हो गया। तब यह व्यवस्था की गई थी कि देश भर में किसी भी मेडिकल या डेंटल कालेज में दाखिले सिर्फ इसी परीक्षा के आधार पर होंगे। इससे छात्रों की दर्जनों परीक्षा देने की बाध्यता दूर होती साथ ही दाखिले में पारदर्शिता आने से भ्रष्टाचार भी दूर होता।

तत्काल लागू होना मुश्किल
स्वास्थ्य मंत्रालय और एमसीआइ दोनों का ही मानना है कि अदालत की ओर से पिछला आदेश वापस ले लिया जाने के बावजूद इस सत्र में इसे लागू कर पाना संभव नहीं होगा। एमसीआइ की अध्यक्ष जयश्री बेन मेहता ने दैनिक जागरण से बातचीत में इस आदेश का स्वागत जरूर किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस परीक्षा को लागू करना छात्र और देश के हित में है। लेकिन एमसीआइ और मंत्रालय दोनों के ही अधिकारी कहते हैं कि मौजूदा व्यवस्था के तहत परीक्षा की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब तत्काल नई व्यवस्था लागू करना व्यवहारिक नहीं है। इस परीक्षा को लागू करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्वास्थ्य मंत्रालय और एमसीआइ दोनों ने ही आवेदन किया था।

पिछले फैसले पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही अपने पुराने फैसले की प्रक्रिया को ले कर सवाल उठा दिए हैं। तब के मुख्य न्यायाधीश अल्तमश कबीर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने निजी मेडिकल कालेजों पर इस परीक्षा को लागू करने से रोक लगा दी थी। मगर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने ताजा आदेश में कहा है कि वह फैसला बिना बहुमत की राय लिए हुए दे दिया गया था। साथ ही फैसला देने से पहले पीठ के सदस्यों से कोई चर्चा नहीं की गई। संविधान पीठ ने अपने चार पेज के लिखित आदेश में यह बात शामिल की है।
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हम साझा परीक्षा के पक्ष में हैं। अगर यह लागू हो जाती है तो हम बहुत खुश होंगे। हम वर्ष 2009 से ही इसकी कोशिश कर रहे हैं
- जयश्री बेन मेहता, अध्यक्ष, मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया

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