यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 08, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मायावती ने किसी दलित नेता को पनपने नहीं दिया
शहरी मध्य वर्ग में केंद्र सरकार की अलोकप्रियता बढ़ती देख कांग्रेस अब अपना पूरा जोर दलितों-पिछड़ों को लुभाने में लगा ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। शहरी मध्य वर्ग में केंद्र सरकार की अलोकप्रियता बढ़ती देख कांग्रेस अब अपना पूरा जोर दलितों-पिछड़ों को लुभाने में लगा रही है। मंगलवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के मौके पर पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बसपा प्रमुख मायावती पर जम कर निशाना साधा और कहा, मायावती ने दलित आंदोलन का नेतृत्व तो हथिया लिया, लेकिन किसी और दलित को राजनीति में आगे नहीं बढ़ने दिया। साथ ही भाजपा पर भी हमला बोला और कहा, इंडिया शाइनिंग अभियान चलाने के बावजूद 2004 और 2009 में लोकसभा चुनाव हारने वाली पार्टी 2014 में फिर हारेगी।
'राहुल को तो लंगोट बांधना भी नहीं आता'
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, दलितों को सदियों से बंधी बेड़ियों की जकड़न से आजादी पाने वाली ताकत (एस्केप वेलोसिटी) की जरूरत है। अंबेडकर का उदाहरण देते हुए कहा, उन्होंने अपने दम पर यह ताकत हासिल कर के दिखाया था। दूसरा चरण आया, जब कांशी राम ने आरक्षण से मिली ऊर्जा का इस्तेमाल किया और दलितों को यह ताकत दिलाने के लिए जमकर संघर्ष किया। तीसरे चरण में मायावती हैं, इन्हें बिना संघर्ष किए यह ताकत मिल गई, लेकिन उन्होंने दलित नेतृत्व पैदा नहीं होने दिया।
रामदेव ने रखी राहुल के सामने शर्त
राहुल ने कहा, 'आज अगर आप उत्तर प्रदेश में पांच दलित नेताओं के नाम पूछेंगे तो जवाब में सिर्फ मायावती का ही नाम मिलेगा, लेकिन मैं चाहता हूं कि हर स्तर पर नेताओं की पूरी पंक्ति होनी चाहिए। यूपी में, दिल्ली में। ब्लाक के स्तर पर, गांव के स्तर पर।' वहीं, वाल्मीकि महासम्मेलन में भाजपा पर हमला बोला और कहा, 2004, 2009 की तरह ही इस बार भी (2014 में) वह लोकसभा चुनाव हारेंगे। राहुल ने कहा, 2004 में सत्ता में रहते भाजपा ने इंडिया शाइनिंग का अभियान चलाया। वह कहते थे भारत चमक रहा है, अगर ऐसा है तो वह चुनाव क्यों हारे।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, अगर आप चुनाव जीतना चाहते हो तो गरीब जनता के पास जाओ और उनके हाथ मजबूत करो, उनकी दिक्कतों को समझो, इसके बाद आप को जीत मिलेगी। कांग्रेस ने गरीबों को भोजन, रोजगार और शिक्षा का अधिकार दिया है। सोनिया गांधी, शीला दीक्षित, प्रधानमंत्री और अन्य सभी लोगों का मानना है कि गरीबों को अधिकार दिए बिना उनकी तरक्की नहीं हो सकती।
अध्यादेश पर खुद को सही ठहराया दागी नेताओं को बचाने वाले अध्यादेश को फाड़ देने लायक बताने वाले बयान को राहुल ने एक बार फिर सही ठहराया है। पूरी सरकार व सीधे प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा देने वाले बयान के बारे में राहुल ने कहा, ऐसा कह कर सिर्फ सच का साथ दिया है, इसके नतीजों का हिसाब-किताब नहीं लगाया।
राहुल ने कहा, 'कहा जा रहा है कि अध्यादेश पर बोलने के लिए मैंने सही समय नहीं चुना, लेकिन सच बोलने के लिए भी क्या कोई समय होता है? अगर आप सच बोलने के लिए भी समय चुनते हैं तो वह सच नहीं रह जाता, बल्कि झूठ बन जाता है।' इससे पहले संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें कहा था कि उनके शब्द बहुत कड़े थे।
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