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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 01, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दिल्ली गैंगरेप: ये कैसा इंसाफ, क्या कानून अंधा है.

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Published: Sun, 01 Sep 2013 08:44 AM (IST)Updated: Sun, 01 Sep 2013 08:45 AM (IST)

दिल्ली गैंगरेप मामले में कोर्ट ने नाबालिग को तीन साल की सजा सुनाई है। इसके विरोध में और मृतक पीड़िता ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली गैंगरेप मामले में कोर्ट ने नाबालिग को तीन साल की सजा सुनाई है। इसके विरोध में और मृतक पीड़िता के इंसाफ के लिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले व नाबालिग के सख्त सजा की मांग करने वाले युवाओं ने कोर्ट के इस फैसले को सिरे से खारिज करते हुए रोष व्यक्त किया है। छात्र-छात्रओं व बुजुर्ग सभी के जुबां पर एक ही सवाल है, ये कैसा इंसाफ है, क्या कानून अंधा है।

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विकास, छात्र:- हम पिछले एक साल से उस बहादुर लड़की के लिए इंसाफ की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसमें सबसे ऊपर नाबालिग को सजा सुनाने की मांग शामिल है। लेकिन कोर्ट का यह फैसला निराशाजनक है।

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संदीप, निजी क्षेत्र में कार्यरत :- सारे सबूत खिलाफ होने व ऐसे जघन्य अपराध के प्रमुख आरोपी को नाबालिग कहना क्या सही है। ऐसे फैसले हमारी न्याय व्यवस्था के खोखलेपन को दर्शाता है। व्यवस्था में सुधार के लिए किसी बड़ी क्रांति की जरूरत है।

पिहू, डीयू छात्र :- जब कोई नाबालिग इस तरह के जघन्य अपराध को अंजाम देता है तो वह व्यस्क की श्रेणी में आता है। ऐसे क्रूर कृत्य में संलिप्त होने पर उसे नाबालिग नहीं कहा जा सकता। क्या कोर्ट ऐसे लोगों को राहत देकर अपराधियों को बढ़ावा देना चाहती है।

च्योति, एकाउटेंट :- आज कोर्ट ने यह साबित कर दिया कि कानून अंधा होता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपराधी के खिलाफ सभी सबूत होते हुए भी सिर्फ नाबालिग के नाम पर उसे राहत मिल गई। यह बेहद अफसोस व दुर्भाग्यपूर्ण है।

शांभवी, डीयू छात्र :- जो सरकार सही विरोध व मांगों को दबा सकती है, उससे उम्मीद भी क्या की जा सकती है। लेकिन क्या महिलाओं के अधिकारों के लिए देश भर में हुए प्रदर्शनों का कोर्ट पर कोई असर नहीं हुआ। हम अपनी मांगों को हमेशा जारी रखेंगे।

रमेश कनवाल, सेवानिवृत अधिकारी :- यह फैसला पूरी तरह गलत है। पीड़िता को इंसाफ तभी मिलेगा, जब उसके गुनाहगार को फांसी की सजा मिले। इसमें कोताही जनता के साथ छलावा है। जिसका परिणाम सरकार को भुगतना पड़ सकता है।

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