यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सिख तीर्थ यात्रियों की हत्या में 47 पुलिस कर्मियों को उम्रकैद
सिख तीर्थ यात्रियों को आतंकी बताकर मार डालने के मामले में सीबीआइ की विशेष अदालत ने 47 पुलिस कर्मियों को ...और पढ़ें

लखनऊ। सिख तीर्थ यात्रियों को आतंकी बताकर मार डालने के मामले में सीबीआइ की विशेष अदालत ने 47 पुलिस कर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में 25 साल पहले इस फर्जी मुठभेड़ को अंजाम दिया गया था।
सीबीआइ विशेष अदालत के न्यायाधीश लल्लू सिंह ने एक अप्रैल को इस मामले में पुलिस कर्मियों को दोषी ठहराया था। कुल 57 पुलिस कर्मियों को आरोपित किया गया था। इनमें दस की पहले ही मौत हो चुकी है। सोमवार को सुनाए गए फैसले में विशेष अदालत ने दोषी पुलिस कर्मियों पर जुर्माना भी लगाया है।
यह था मामला
12 जुलाई, 1991 को सिख तीर्थ यात्रियों से भरी लक्जरी बस को पुलिस ने रोका। इनमें से दस तीर्थ यात्रियों को बस से उतार लिया। आरोप पत्र के मुताबिक बस से उतारे गए यात्रियों को जंगल में ले जाकर गालियों से भून दिया गया। अगले दिन पुलिस कर्मियों ने दस खालिस्तानी आतंकियों को मार गिराना का दावा किया। यह भी कहा गया कि मारे गए यात्रियों में कई पर आपराधिक मामले थे और उनके पास से हथियार भी बरामद किए गए। उस वक्त उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र आतंकी गतिविधियों से जूझ रहा था।
बताती है सीबीआइ
सुुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ ने इस मामले की जांच शुरू की। सीबीआइ ने बताया कि तीर्थ यात्रियों की हत्या के पीछे मंशा आतंकियों को मारने के नाम पर अवार्ड हासिल करना था। सीबीआइ के मुताबिक बस जब पीलीभीत के लिए जा रहा थी, पुलिस ने कछलापुल घाट पर उसे रोक लिया। 10 पुरुष तीर्थ यात्रियों को बस से खींच कर उतार लिया गया। महिलाओं और बच्चों सहित अन्य यात्रियों को पीलीभीत में गुरुद्वारा ले जाया गया। पुरुषों को अलग वाहन में बैठाया गया। इसके बाद वहां अन्य पुलिस कर्मी भी जुट गए। पुरुष तीर्थ यात्रियों को तीन समूहों में बांटकर ले जाया गया। तीन फर्जी मुठभेड़ों में दस सिख यात्रियों को मार गिरया गया। ये तीनों मुठभेड़ न्यूरिया, बिलसंडा और पूरनपुर थाना क्षेत्र में दिखाए गए। मारे गए सभी यात्रियों का आनन-फानन पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस ने उसी दिन अंतिम संस्कार भी करा दिया।
फांसी तक जारी रहेगी कानूनी जंग
जागरण संवाददाता, पीलीभीत : फर्जी मुठभेड़ में दस निर्दोष सिख तीर्थयात्रियों की हत्या के मामले में सीबीआइ की विशेष अदालत के फैसले से मुख्य पैरवीकर्ता हरङ्क्षजदर ङ्क्षसह कहलो ने असंतुष्टि जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा दिलाने तक कानूनी जंग जारी करेगी। उन्होंने बताया कि 25 साल पहले जिले की पुलिस ने आतंकवाद खत्म करने के नाम पर जघन्य तरीके से अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर 10 निर्दोषों की हत्या कर दी। इस अपराध की सजा फांसी से कम नहीं होनी चाहिए।
सीबीआइ की विशेष अदालत ने सभी 47 दोषियों को उम्रकैद के साथ ही 14-14 लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपना बेटा, भाई, पति और पिता को इस फर्जी मुठभेड़ में खो दिया, उन्हें पूरा न्याय दिलाने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। जिन पुलिसकर्मियों पर अदालत में दोष सिद्ध हो चुका, उन्हें फांसी दिलाने और इस पूरे प्रकरण में शामिल रहे तत्कालीन आइजी जोन, बरेली रेंज के डीआइजी व पुलिस अधीक्षक को सजा दिलाने के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
