यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 09, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कहीं और नहीं जाएगा एनआइटी श्रीनगर :निर्मल सिंह
एनआइटी विवाद को हल करने के लिए आंदोलनरत गैर कश्मीरी छात्रों के प्रतिनिधियों और राज्य प्रशासन के बीच शुक्रवार को मैराथन बैठक हुई।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर । एनआइटी विवाद को हल करने के लिए आंदोलनरत गैर कश्मीरी छात्रों के प्रतिनिधियों और राज्य प्रशासन के बीच शुक्रवार को मैराथन बैठक हुई। उत्तेजित छात्रों को शांत करने की कोशिश की गई। उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने बताया कि हमने छात्रों की अधिकांश तर्कसंगत मांगें मान ली हैं, लेकिन न एनआइटी का स्थानांतरण होगा और न परीक्षा स्थगित होगी। लाठीचार्ज में दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन न्यायिक जांच के बाद। वहीं एनआइटी के आंदोलनरत गैर कश्मीरी छात्रों ने इसकी पुष्टि नहीं की। छात्र देर रात तक बारिश के बीच भी एनआइटी परिसर में धरने पर डटे हुए थे। परिसर भारत माता की जय और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों से गूंज रहा था।
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वहीं एनआइटी में पिछले एक सप्ताह से जारी तनाव शुक्रवार को भी बना रहा। एनआइटी परिसर में आंदोलनरत गैर कश्मीरी छात्रों ने अपनी कक्षाओं का बहिष्कार कर मांगों के समर्थन में जुलूस निकाला, पर पुलिस ने उन्हें बाहरी गेट की तरफ नहीं आने दिया। एनआइटी में लाठीचार्ज की घटना के बाद से प्रशासन गैर कश्मीरी छात्रों को मनाने में लगा हुआ है, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। शुक्रवार को भी राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान परिसर के भीतर व बाहर मुस्तैद रहे। किसी भी बाहरी तत्व को बिना संबंधित प्रशासन की अनुमति के भीतर दाखिल नहीं होने दिया गया। मीडिया के प्रवेश को भी पूरी तरह बंद रखा गया।
छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च
एनआइटी परिसर शुक्रवार शाम एक बार फिर जगमगा उठा, लेकिन बिजली के बल्ब की रोशनी से नहीं बल्कि मोमबत्तियों की लौ से। परिसर में आंदोलनरत गैर कश्मीरी छात्रों ने अपनी मांगों के समर्थन में करीब सात बजे हाथों में मोमबत्तियां लेकर जुलूस निकाला। ये छात्र अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे और चाहते थे कि उन्हें मीडिया के समक्ष अपनी बात रखने की अनुमति दी जाए, लेकिन सुबह की तरह एनआइटी प्रशासन और पुलिस ने उन्हें बाहरी गेट की तरफ आने की इजाजत नहीं दी।
