यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 19, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बंदर ने पेशाब कर इस तरह बचाई एक ही परिवार के 30 लोगों की जान !
भले ही यह सुनने में यह थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा होगा कि एक बंदर के पेशाब करने से तीस ...और पढ़ें

बेंगलुरु। एक बंदर के पेशाब की वजह से एक ही परिवार के तीस लोगों की जान बच गई। नहीं, नहीं। जैसा आप सोच रहे हैं, वैसा बिल्कुल भी नहीं है। न तो बंदर के पेशाब का इस्तेमाल दवा के तौर पर किया गया था और न किसी तरह के अंधविश्वास से जुड़ा मामला है। यह तो महज बंदर के पेशाब करने के समय से जुड़ा मामला है।
बीते शनिवार को श्रीरंगापट्टनम में कावेरी नदी के तट पर एक धार्मिक अनुष्ठान के लिए एक परिवार के 30 लोग पहुंचे थे। कावेरी नदी में पवित्र स्नान करने के बाद वे सभी वहां एक आम के पेड़ के नीचे बैठे थे। उन्हें वहां बैठे अभी पांच मिनट भी नहीं हुए थे कि पेड़ पर ऊपर बैठे एक बंदर ने नीचे बैठे लोगों पर पेशाब कर दी। इससे झल्लाए व गुस्साए परिवार के सदस्यों ने बंदर को लानत भेजते हुए पेड़ के नीचे से हट गए। हालांकि, परिवार के तीन अन्य सदस्य जो पेड़ की दूसरी तरफ थे, वहीं बैठे रहे।
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अचानक ही आम का वह विशाल पेड़ गिर पड़ा, जिसके नीचे वे तीन सदस्य दब गए। इनमें से एक रत्नामा (40 वर्ष) की मौत मौके पर ही हो गई और जबकि दो अन्य दक्षिणी (25 वर्ष) और पुनुइता (10 वर्ष) घायल हो गए। एक सदस्य की मौत से परिवार के अन्य सदस्य दुखी थे, लेकिन साथ ही उस बंदर के प्रति आभारी भी थे जिसे वे थोड़ी देर पहले लानतें भेज रहे थे।
परिवार के एक सदस्य ने कहा कि बंदर के पेशाब करने की वजह से ही इतने सारे लोगों की जान बच गई।
इसलिए कहा जाता है कि जो भी होता है, वह अच्छे के लिए ही होता है।
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(साभार- नई दुनिया)
