यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 28, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पाकिस्तान से डॉक्टर बनने भारत आई 'मशाल' का टूट रहा है सपना, जानिए क्यों?
धार्मिक उत्पीड़न से बचने को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत के जयपुर में आकर तो बस गए पर अब ...और पढ़ें

जयपुर। पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए सिंध प्रांत से माता-पिता के साथ जयपुर आने के दो साल बाद 20 वर्षीय मशाल का डॉक्टर बनने का सपना टूटता सा दिख रहा है।
जहां पिछले हफ्ते सीबीएसई बारहवीं का रिजल्ट उनके लिए खुशियों का मौका लेकर आया था वहीं अब उनके परिवार में तनाव है। बारहवीं में 91 फीसद अंक पाने वाली मशाल ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट में शिरकत नहीं कर सकेगी क्योंकि वह विदेशी है।
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मशाल ने कहा,’ इसमें राष्ट्रीयता के लिए मात्र दो ऑप्शन हैं: भारतीय या एनआरआई। मैं किसी भी कैटेगरी में नहीं हूं।‘ मशाल के माता-पिता दोनों ही डॉक्टर हैं। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद उन्होंने सिंध में नौकरी छोड़ भारत वापस लौटने का निर्णय लिया था। जून 2014 में भारत आने के बाद उनके मशाल व उनके दो अन्य भाई-बहनों का नामांकन निजी स्कूल में कराया गया और लांग टर्म वीजा पर वे जयपुर में रह रहे हैं।
मशाल के माता-पिता ने कहा, वे दोनों राजस्थान की राजधानी में एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं और उनका बजट प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में मशाल की एडमिशन कराने लायक नहीं है। मशाल के पिता ने कहा,’प्राइवेट कॉलेज कम से कम 1 करोड़ रुपये डोनेशन के तौर पर लेते हैं। इसलिए यदि उसका नामांकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में नहीं हुआ तो हम उसे डॉक्टर नहीं बना सकेंगे।‘ उन्होंने आगे बताया कि विदेश, स्वास्थ्य व मानव संसाधन विकास मंत्रालयों के दरवाजे को खटखटा चुके हैं पर कहीं से कोई मदद नहीं मिल पा रही।
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राजस्थान सरकार ने कहा कि वह उनकी मदद के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकती, अब ऑल इंडिया इंट्रेंस टेस्ट केंद्र द्वारा ली जाएगी। राज्य स्वास्थय मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘इसलिए मैं केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय को लिख रहा हूं, जिसमें पाकिस्तानी हिंदू प्रवासियों के लिए रिजर्वेशन की मांग करूंगा ताकि वे इन मौकों की सुविधा ले सकें।‘
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मशाल ने कहा,’यदि अगले दो तीन हफ्तों में इस मामले में कोई स्पष्ट फैसला नहीं मिला तो मुझे कुछ और पढ़ना होगा। पहले ही मैं एक साल खो चुकी हूं जिसके दौरान कोचिंग के लिए ढेरों पैसे भी गए हैं। अब दूसरा साल नहीं बर्बाद कर सकती।‘
पाकिस्तानी हिंदू प्रवासियों के साथ काम कर रहे संगठन ‘सीमांत लोक संगठन के हिंदू सिंह सोधा ने इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा, ‘पहले तो सरकार उन्हें यहां शरण देती है और इसके बाद उन्हें पाकिस्तानी राष्ट्र नागरिकों के तौर पर देखती है। यदि भारत सरकार उन्हें सुविधाएं नहीं दे सकती तो यहां नहीं बुलाना चाहिए।‘
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मशाल के माता-पिता अपने परिवार व पाकिस्तान में रह रहे रिश्तेदारों के सुरक्षा की दृष्टि से अपने पहचान को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे लेकिन पाकिस्तानी लेबल हटने का नाम नहीं ले रहा। मशाल के पिता ने कहा,’ हमलोगों पर लेबल लगा है: पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू, भारत में पाकिस्तानी।‘
