यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जल्द ही मिलेगा अमरूद से बनी चाकलेट का स्वाद
जल्द ही आपको अमरूद से बनी चाकलेट, टाफी व श्रीखंड का स्वाद मिलेगा। जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होगा। ...और पढ़ें

वाराणसी (अभिनव भट्ट)। जल्द ही आपको अमरूद से बनी चाकलेट, टाफी व श्रीखंड का स्वाद मिलेगा। जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होगा। बाजार में आने वाले इन उत्पादों का नाम ग्वावा बाइट दिया गया है। वाराणसी के कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू के सेंटर फार फूड टेक्नालाजी के वैज्ञानिकों का प्रयास अब शीघ्र ही मूर्तरूप लेने वाला है। यही नहीं इसका श्रीखंड व पाउडर उत्पाद भी बनाया है। पाउडर जहां मधुमेह व ब्लड प्रेशर जैसे मर्ज में दवा की तरह काम करेगा वहीं श्रीखंड स्वाद व पौष्टिकता से भरपूर होगा। अब पेटेंट कराने की कवायद की जा रही है।
दरअसल संस्थान में प्रो.अनिल सिंह चौहान व प्रो.रविप्रताप सिंह के निर्देशन में वैभव पाटिल इस पूरी प्रक्त्रिया पर दो वषरें से शोधरत हैं। शोध का प्रकाशन च्पाउडर टेक्नालाजीच् अंतरराष्ट्रीय व प्रासेस्ड फूड इंडस्ट्री नामक राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में भी हो चुका है।
ऐसे किया शोध
पहले अधपके व पके अमरूदों को इकट्ठा किया गया। बीज व गूदा अलग किया। गूदे में माल्टो डेक्सि्ट्रन नामक तत्व मिलाकर इसे चाकलेट, टाफी व श्रीखंड का रूप दिया गया। उक्त तत्व उत्पाद में चमक लाने के काम में प्रयुक्त होता है। इसके बाद गूदे का पाउडर बनाने के लिए स्प्रे ड्राइंग तकनीक अपनाई गई जो गूदे को सुखाने में सहायक होता है।
बीज से दवा
अमरूद के अलग हुए बीजों को भी स्प्रे ड्राइंग तकनीक से सुखाकर उनका पाउडर बनाया गया। बीज के बने पाउडर से ब्लड प्रेशर, मधुमेह आदि बीमारियों की दवा बनाई गई है।
कंपनियों से बात
प्रो.चौहान के अनुसार ग्वावा बाइट चाकलेट, टाफी व जायकेदार श्रीखंड के लिए खाद्य वैज्ञानिक कंपनियों से बात कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले साल में अमरूद की चाकलेट, टाफी व श्रीखंड खाने को मिल जाए।
प्रो.रविप्रताप सिंह ने बताया अमरूद के ये उत्पाद लंबे समय तक खराब नहीं होंगे। इसका डेढ़ साल तक प्रयोगशालाओं में परीक्षण भी हो चुका है। यहां तक कि निजी कंपनियों ने भी अपनी प्रयोगशाला में परीक्षण किया हैं।
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