यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 04, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'नमामि गंगे' की होगी ऑनलाइन निगरानी
गंगा को निर्मल बनाने के लिए चलाए जा रहे 'नमामि गंगे' अभियान की जमीनी स्तर पर ऑनलाइन निगरानी के लिए ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। गंगा को निर्मल बनाने के लिए चलाए जा रहे 'नमामि गंगे' अभियान की जमीनी स्तर पर ऑनलाइन निगरानी के लिए सरकार भौगोलिक सूचना प्रणाली [जीआइएस] का इस्तेमाल करेगी। जीआइएस आधारित इस निगरानी प्रणाली से किसी भी औद्योगिक इकाई या शहर से रोजाना निकलने वाली गंदगी पर नजर रखी जा सकेगी। इसके जरिये यह भी पता लगाया जा सकेगा कि किस शहर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट [एसटीपी] चल रहे हैं और कहां बंद पड़े हैं। किस शहर में एसटीपी कितनी बिजली का उपभोग कर रहे हैं इस बात का पता भी इसके जरिये चल सकेगा।
सूत्रों के मुताबिक केंद्र 'नमामि गंगे' अभियान के तहत गंगा को निर्मल बनाने के कार्यक्रमों की ऑनलाइन निगरानी की तैयारी कर रहा है। इसके तहत पूरे गंगा बेसिन से जुड़ी विभिन्न सूचनाएं जुटाकर उनका विश्लेषण किया जा रहा है। इसमें जीआइएस की मदद ली जा रही है। इसके पहले भाग में अलग-अलग जगहों पर गंगाजल के प्रवाह संबंधी आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इसके बाद गंगा में शहरों तथा औद्योगिक इकाइयों से प्रवाहित होने वाले प्रदूषण संबंधी वास्तविक आंकड़े जुटाए जाएंगे। ऐसा होने पर किसी एक शहर या औद्योगिक इकाई की ताजा स्थिति पता की जा सकेगी।
गंगा में प्रदूषण की निगरानी का जिम्मा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड [सीपीसीबी] के हाथ होगा। इसके साथ ही सीपीसीबी समय-समय पर गंगाजल की गुणवत्ता भी परखता रहेगा। इसके लिए सीपीसीबी गंगा पर अपने निगरानी स्टेशनों की संख्या भी बढ़ा सकता है।
सूत्रों ने कहा कि प्रभावी निगरानी तंत्र बनाने का मकसद जमीनी स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है। गंगा को निर्मल बनाने संबंधी कार्यक्रमों का अब तक अनुभव बताता है कि निगरानी के अभाव में कार्यक्रम पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं। इसलिए कार्यक्रम बनाते समय उनकी निगरानी करने की व्यवस्था पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है।
इस बीच राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन [एनएमसीजी] ने निगरानी व्यवस्था बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डो के साथ बैठक की है। इसके अलावा 29 सितंबर को कागज उद्योग के साथ बैठक की। कागज उद्योग से भी काफी गंदगी गंगा में आकर गिरती है।
