यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 14, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दिल्ली : फिलहाल बिल नहीं देगा झटका, बढ़ी कीमतें नहीं होंगी लागू
दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) ने बिजली खरीद समन्वय लागत शुल्क (पीपीएसी) बढ़ाने की घोषणा के बाद उसे वापस ले ...और पढ़ें

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) ने बिजली खरीद समन्वय लागत शुल्क (पीपीएसी) बढ़ाने की घोषणा के बाद उसे वापस ले लिया है। अभी बिजली की पुरानी दरें ही लागू रहेंगी। शुल्क लागू होने की स्थिति में दिल्ली में बिजली 2.5 फीसद से सात फीसद तक महंगी होने की बात थी। इस बढ़ोतरी का भाजपा ने विरोध करते हुए ऊर्जा मंत्री से शिकायत करने की बात कही थी।
गौरतलब है कि इस वर्ष 17 जुलाई को डीईआरसी द्वारा घोषित बिजली की नई दरों में 8.5 फीसद तक बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि, तीन माह के लिए पीपीएसी हटाने से इसका ज्यादा असर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा था। उसके बाद 11 अगस्त 2014 से 400 यूनिट प्रति माह तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी भी दी जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल रही थी। अब उन्हें ज्यादा बिजली बिल का भुगतान करना पड़ेगा, क्योकि उनसे 15 नवंबर से पीपीएसी वसूला जाएगा। इसका सबसे ज्यादा बोझ बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें सात फीसद पीपीएसी देना होगा।
क्या है पीपीएसी
ईंधन के दाम बढऩे से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों से बढ़े हुए मूल्य पर बिजली खरीदनी पड़ती है। वहीं, उपभोक्ताओं को बेची जाने वाली बिजली की दरें इस अनुपात में नहीं बढ़ती हैं। इस घाटे की भरपाई के लिए डिस्कॉम को उपभोक्ताओं से पीपीएसी वसूलने की अनुमति दी जाती है। इसका निर्धारण डीईआरसी करती है।
भाजपा ने किया विरोध
दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं से पीपीएसी वसूलने का फैसला गलत है। भाजपा इसका विरोध करती है। इस मुद्दे को ऊर्जा मंत्री के सामने उठाया जाएगा।
उपभोक्ताओं से वसूला जाने वाला पीपीएसी
बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड -- 4.5 फीसद
बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड -- 7 फीसद
टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड -- 2.5 फीसद
सब्सिडी लागू होने के बाद 11 अगस्त से उपभोक्ताओं को निम्न दर से बिजली मिल रही है
यूनिट -- बिजली की दरें -- देय दर -- सब्सिडी
0-200 यूनिट -- 4.00 रुपये -- 2.80 रुपये -- 1.20 रुपये
201-400 -- यूनिट -- 5.95 रुपये -- 5.15 रुपये -- 80 पैसे
