यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 30, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आइएम-माओवादियों का खौफनाक गठजोड़
पटना ब्लास्ट के बाद एनआइए और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा रांची में विभिन्न स्थानों पर की जा रही छापेमारी में ...और पढ़ें

रांची [जागरण ब्यूरो]। पटना ब्लास्ट के बाद एनआइए और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा रांची में विभिन्न स्थानों पर की जा रही छापेमारी में इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) और नक्सलियों की गठजोड़ का खुलासा हुआ है।
इस मामले में गिरफ्तार उजैर अहमद के डोरंडा के मनीटोला स्थित आवास से बरामद अहम दस्तावेज बताते हैं कि इंडियन मुजाहिदीन अपने संगठन को सशक्त बनाने के लिए वर्षो से प्रयासरत है। इसके लिए नक्सली संगठन के नेताओं से कई दौर की बैठक भी हुई थी। आइएम की ओर से 2010-11 में दो बार वकास और 2012 में एक बार तहसीन ने गढ़वा-पलामू सीमा क्षेत्र में हुई बैठक में भाग लिया था। बैठक में इस बात पर सहमति बनी थी कि दोनों ही संगठनों को एक-दूसरे की जरूरत है। वे अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में एक-दूसरे को मदद करेंगे। इसके तहत आइएम नक्सलियों को शहरी क्षेत्र में और नक्सल संगठन ग्रामीण क्षेत्र में उसकी मदद करेंगे। उक्त संगठनों के बीच जनवरी 2014 में होने वाली बैठक में अंतिम सहमति पर निर्णय होना था। इससे पहले ही मामले का भंडाफोड़ हो गया।
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झारखंड में नक्सल मामले और खुफिया तंत्र की कमान संभालने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्व में भी नक्सली दूसरे संगठनों से गठजोड़ की फिराक में रहे हैं। करीब 10-11 साल पहले गढ़वा और पलामू सीमा के समीप बड़े नेताओं ने बैठक आयोजित की थी। इसमें उल्फा, हिजबुल मुजाहिदीन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। इसमें सिर्फ इस बात पर चर्चा हुई थी कि एक-दूसरे के चुनिंदा कैडर को प्रशिक्षित करने में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।
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उल्फा और हिजबुल नक्सलियों को अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराएंगे। कई बार नक्सल अभियान के दौरान विदेशी हथियारों को पुलिस ने बरामद भी किया था। ये हथियार पाकिस्तान और चीन में निर्मित थे।
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