यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 08, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
टला नहीं है स्मॉग का खतरा, कुछ समय के लिए ही है प्रदूषण से फौरी राहत
आने वाले दिनों में तापमान में कमी आएगी। सो कोहरे का असर भी बढे़गा। इसके चलते बुधवार के बाद फिर से स्मॉग का असर बढ़ सकता है।

नई दिल्ली [ जेएनएन ]। जहरीले स्मॉग के चलते कई दिनों से बदहाल राजधानी दिल्ली के लिए सोमवार का दिन मामूली राहत लेकर आया। दोपहर में चली हवाओं ने कुछ हद तक स्मॉग से राहत दिलाई। हालांकि, शाम होते-होते फिर से हवा की रफ्तार धीमी हो गई। इससे प्रदूषण के स्तर में ज्यादा कमी नहीं आई। अब भी वह खतरनाक स्तर पर बरकरार है।
स्काई मेट के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि करीब साढे़ ग्यारह बजे एकाएक चली पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हवाओं के असर से स्मॉग कुछ हद तक छंट गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सोमवार को मिली राहत फौरी है। आने वाले दिनों में तापमान में कमी आएगी। सो कोहरे का असर भी बढे़गा। इसके चलते बुधवार के बाद फिर से स्मॉग का असर बढ़ सकता है।
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इस बीच, उपराज्यपाल नजीब जंग ने दिल्ली में 15 साल पुराने डीजल वाहनों पर रोक लगा दी है। सोमवार से ही 15 साल या उससे अधिक पुराने डीजल वाहनों के पंजीकरण रद करने की कार्रवाई शुरू हो गई। इससे दिल्ली में दो लाख वाहन कम होंगे। प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी।
प्रदूषण के खिलाफ सीधी जंग
- उपराज्यपाल नजीब जंग ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक के बाद कठोर कदम का एलान किया।
- विवाह समारोह तथा अन्य मौकों पर पटाखे चलाने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, धार्मिक अनुष्ठानों को इससे छूट मिलेगी।
- दिल्ली को ट्रांजिट प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल करने वाले ट्रकों के राजधानी में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है।
- भलस्वा समेत अन्य लैंडफिल साइटों पर लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए नगर निगम हरसंभव प्रयास करेगा।
- कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर पांच दिन तक लगी रोक को अब 14 नवंबर तक बढ़ा दिया गया है। यही नियम अतिक्रमण के काम पर भी लागू होगा।
- प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टि्रयों को तुरंत प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया है। दिल्ली की सीमाओं पर स्मोक मीटर लगाए जाएंगे।
केंद्र ने दिल्ली को जिम्मेदार बताया
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा है कि खराब हवा के लिए दिल्ली खुद ही जिम्मेदार है। पराली जलाने का इस प्रदूषण में मात्र 20 फीसद का योगदान है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पेट्रोल, डीजल, कोयला, लकड़ी, सूखी पत्तियां और जगह-जगह कचरा जलाया जा रहा है। पटाखे चलाने से भी यह समस्या बढ़ी है। सोमवार को राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के बाद दवे ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों की है। उन्होंने किसी ठोस कार्ययोजना की घोषणा नहीं की।
बैठक में मौजूद हरियाणा के पर्यावरण मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि इस समस्या की जड़ वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन है। उन्होंने पराली जलाने को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। दूसरी तरफ, पंजाब के पर्यावरण मंत्री तोता सिंह ने कहा कि पराली जलाने से प्रदूषण नहीं हो रहा। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने कृत्रिम बारिश के विकल्प पर विचार करने का सुझाव दिया।
