यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 20, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जस्टिस गांगुली को धमकी भरा पत्र
इंटर्न लॉ छात्रा के साथ यौन शोषण आरोपों का सामना कर रहे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली ...और पढ़ें

कोलकाता, [जाब्यू]। इंटर्न लॉ छात्रा के साथ यौन शोषण आरोपों का सामना कर रहे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली के मामले में नया पेंच आ गया है। उन्हें छेड़खानी के मामले में फंसाने की धमकी भरा पत्र मिला है। जिस पर पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग कार्रवाई का मन बना रहा है। एक लॉ क्लर्क द्वारा लिखे गए इस पत्र पर आयोग ने कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए वेस्ट बंगाल स्टेट लॉ क्लर्क्स काउंसिल को त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया है। हालांकि आरोपी लॉ क्लर्क ने बृहस्पतिवार को पत्र लिखने से साफ इन्कार किया है।
मानवाधिकार आयोग के रजिस्ट्रार रवींद्र नाथ सामंत ने कहा कि बर्द्धमान अदालत की विधि क्लर्क असीमा मल्लिक ने 18 सितंबर को जस्टिस गांगुली को हस्तलिखित पत्र भेजा था, जिसमें उसका मोबाइल नंबर भी लिखा है। पत्र के सत्यापन की बाबत सामंत ने बताया कि आयोग ने पता लगाया था कि बर्द्धमान शहर की एक फैक्स दुकान से एक महिला ने पत्र फैक्स किया था। उन्होंने कहा कि लॉ क्लर्क्स काउंसिल का जवाब मिलने के बाद ही आयोग कोई प्रतिक्रिया देगा।
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बर्द्धमान शहर की आरोपी लॉ क्लर्क ने पत्र लिखने से इन्कार किया है। उसका कहना है कि आयोग के चेयरमैन को पत्र लिखने से मेरा कुछ लेना-देना नहीं है। मैंने कोई चिठ्ठी नहीं लिखी। उसने दावा किया कि बर्द्धमान कोर्ट के एक वकील से टाइपिंग को लेकर विवाद हुआ था। यह पत्र भी किसी साजिश का नतीजा हो सकता है। क्लर्क्स काउंसिल के उपाध्यक्ष विपदतारणी आइच ने कहा कि मल्लिक के लिए इस तरह की चिट्ठी लिख पाना संभव नहीं है, क्योंकि उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वैसी नहीं है। पत्र की जांच की जाएगी।
उनके अनुसार पत्र में लिखा है कि आप [एके गांगुली] माकपा के दलाल हैं। पार्टी से आपको कितना भत्ता मिलता है? आप विश्वास के लायक नहीं हैं। ममता दी ने आपका सम्मान किया लेकिन आप उन्हें शर्मिदा करने का प्रयास कर रहे हैं। मैं आपके खिलाफ छेड़खानी का मामला दर्ज कराउंगी।
एक निजी चैनल पर साक्षात्कार में जस्टिस गांगुली मीडिया पर भड़क उठे। उन्होंने कहा कि बिना अपराध साबित हुए ही मीडिया उनके साथ अपराधियों की तरह व्यवहार कर रहा है।
गांगुली के बचाव में आए सोमनाथ
जस्टिस गांगुली के बचाव में एक बार फिर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी सामने आए। उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार से न्यायमूर्ति गांगुली के खिलाफ फिर से जांच करने को कहता है तो यह न्याय का उपहास होगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक प्रशासनिक जांच करा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस गांगुली यदि झूठ बोलते हैं तो उन्हें भुगतना होगा। लेकिन सुशील कुमार शिंदे बताएं कि उनका अधिकार क्षेत्र क्या है।
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