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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 19, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जस्टिस गांगुली को पद से हटाने की प्रकिया आगे बढ़ी

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Published: Thu, 19 Dec 2013 10:08 PM (IST)Updated: Thu, 19 Dec 2013 10:10 PM (IST)

प्रशिक्षु महिला वकील के यौन उत्पीड़न के आरोपी जस्टिस गांगुली की मुश्किलें कदम दर कदम बढ़ती जा रही हैं। इस्तीफा ...और पढ़ें

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रशिक्षु महिला वकील के यौन उत्पीड़न के आरोपी जस्टिस गांगुली की मुश्किलें कदम दर कदम बढ़ती जा रही हैं। इस्तीफा न देने पर अड़े जस्टिस गांगुली को पद से हटाने के लिए सरकार ने प्रेसीडेंसियल रिफरेंस भेजने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। पहले गृह मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से इस पर राय मांगी। तो अब कानून मंत्रालय ने मामले में अटार्नी जनरल से परामर्श मांगा है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एके गांगुली इस समय पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं।

मानवाधिकार कानून के मुताबिक मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट को रिफरेंस भेजेंगे। सुप्रीम कोर्ट आरोपों की जांच कर राष्ट्रपति को राय भेजकर बताएगा कि दुराचार के आरोप साबित हुए (प्रूव्ड मिसकंडेक्ट)। सुप्रीम कोर्ट की राय के बाद राष्ट्रपति अध्यक्ष को पद से हटाने का आदेश जारी करेंगे। जस्टिस गांगुली को पद से हटाने की ये प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की जांच कमेटी ने जस्टिस गांगुली को प्रथम दृष्टया प्रशिक्षु के साथ यौन दु‌र्व्यवहार का दोषी माना है। रिपोर्ट के बाद से गांगुली को पद से हटाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राष्ट्रपति को पत्र भेजकर जस्टिस गांगुली को राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी।

पढ़ें: जस्टिस गांगुली पर कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय सक्रिय

एडीशनल सालीसिटर जनरल इंद्रा जयसिंह ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गांगुली को हटाने की अपील की थी। इतना ही नहीं इंद्रा जयसिंह ने अपनी मांग दोहराते हुए पीड़िता प्रशिक्षु का जांच कमेटी के समक्ष दिया गया हलफनामा भी सार्वजनिक कर दिया। इसमें प्रशिक्षु ने गांगुली की नागवार हरकतों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है।

राष्ट्रपति ने गांगुली को हटाने की मांग वाली ममता बनर्जी की चिट्ठी आगे कार्रवाई के लिए सरकार को भेज दी है। मामले में प्रेसिडेंसियल रिफरेंस भेजने का मन बनाते हुए गृह मंत्रालय ने मामले को विचार के लिए कानून मंत्रालय भेजा है। सूत्र बताते हैं कि अब कानून मंत्रालय ने इस पर अटार्नी जनरल से राय मांगी है। समझा जा रहा है कि चारों ओर से उठती मांग को देखते हुए सरकार जल्दी ही प्रेसीडेंसियल रिफरेंस के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे देगी और सुप्रीम कोर्ट को भेज देगी।

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