यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ईवीएम की झूठी शिकायत पड़ सकती है महंगी, होगी जेल
इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की झूठी शिकायत महंगी पड़ सकती है। अगर आपका वोट उस पार्टी को नहीं पड़ा ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जाब्यू]। इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की झूठी शिकायत महंगी पड़ सकती है। अगर आपका वोट उस पार्टी को नहीं पड़ा है जिसके चुनाव चिन्ह का बटन आपने ईवीएम पर दबाया था तो आप इसकी शिकायत चुनाव आयोग से कर सकते हैं, लेकिन इतना ध्यान रहे कि यह शिकायत झूठी साबित होने पर आपको जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है।
आयोग ने लोकसभा चुनाव में इस बार चुनिंदा सीटों पर ईवीएम से पर्ची निकलने की व्यवस्था की है। इस पर्ची के जरिये मतदाता को पता चल जायेगा कि उसने किस पार्टी को वोट दिया है और उसका वोट सही पड़ा है या नहीं। अगर किसी मतदाता का वोट उस दल को नहीं पड़ता है जिसे देने के लिए उसने ईवीएम पर बटन दबाया है तो वह इसकी शिकायत वहां उपस्थिति चुनाव अधिकारियों से कर सकता है। शिकायत करने वाले मतदाता को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर पीठासीन अधिकारी को देना होगा। अगर यह घोषणापत्र असत्य पाया गया तो छह महीने की सजा या एक हजार रुपये तक जुर्माना लग सकता है।
आयोग ने दिल्ली सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से ईवीएम मशीन से पर्ची निकलने की व्यवस्था शुरु की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की एक-एक सीट पर यह व्यवस्था लागू की है। यूपी में लखनऊ तथा बिहार में पटना साहिब में यह व्यवस्था की गयी है। मिजोरम में भी 200 से अधिक मतदान केंद्रों पर ऐसी ईवीएम भेजी गयी हैं जिनसे पर्ची निकलेगी।
