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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 20, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कुत्ता कह दो मुझे, पर पाकिस्तानी कहलाना मंजूर नहीं: बलूच शरणार्थी

By kishor joshiEdited By:
Published: Sat, 20 Aug 2016 10:29 AM (IST)Updated: Sat, 20 Aug 2016 01:57 PM (IST)

दिल्ली में रह रहे एक एक बलूची नागरिक ने बताया कि पाकिस्तानी सेना किस तरह बलूच नागरिकों पर अत्याचार करती है।

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नई दिल्ली। कुछ महीने पहले जब 25 साल के मजदक दिलशाद बलूच जब नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे तो इमिग्रेशन के अधिकारियो को उन पर संदेह हुआ। दिलशाद के पास कनाडा का पासपोर्ट था जिसमें जन्मस्थान वाले कॉलम में पाकिस्तान के क्वेटा का नाम अंकित था।

दिल्ली में रह रहे कुछ बलूच शरणार्थियों में से एक मजदक दिलशाद ने एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए बताया, "मैंने इमिग्रेशन अधिकारियों को समझाया कि मैं पाकिस्तानी नहीं हूं। मुझे कुत्ता कह लें, लेकिन पाकिस्तानी नहीं कहें। मैं बलूच हूं और अपने जन्मस्थान के कारण मुझे जिंदगी में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है।"

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मजदक की कहानी और पीड़ा उन हजारों बलूच नागरिकों की भी है जिन्हें पाकिस्तानी आर्मी के अत्याचारों के कारण विश्व के कई भागों में शरणार्थी के रूप में रहना पड़ रहा है। मजदक ने बताया कि उनके पिता को अगवा कर लिया गया और मां का शोषण किया गया तथा उनकी पैतृक संपत्ति को नष्ट कर दिया गया।

मजदक का परिवाद इन दिनों कनाडा में रह रहा है। मजदक और उनकी पत्नी भारत इसलिए आए हुए हैं तांकि वो लोगों को बलूच आजादी आंदोलन के बारे में जानकारी दे सके। मजदक ने बताया कि मुझे इस बात की खुशी है कि आजादी के 70 साल बाद ही सही लेकिन भारत ने हमारे समर्थन में अपने द्वार खोले हैं।

15 अगस्त को लालकिले से अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा था, "मैं बलूचिस्तान, गिलगित और पीओके के का धन्यवाद देता हूं, उन्होंने मेरे प्रति उन्होंने जो सद्भावना जताई है... ऐसे दूर सुदूर बैठे हुए लोग हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री को अभिनन्दन करते हैं, उसका आदर करते हैं, तो मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों का आदर है, वो मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। और इसलिए ये सम्मान का भाव, धन्यवाद का भाव करने वाले बलूचिस्तान, गिलगित और पाक के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों का मैं आज तहे दिल से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ।"

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मजदक के पिता मीर गुलाम मुस्तफा एक फिल्मकार थे जिनका पाकिस्तानी आर्मी द्वारा 2006 और 2008 में अपहरण कर लिया गया था। मजदक की मां एक राजनीतिक एक्टिविस्ट है। मजदक ने बताया, "मेरे पिता की रिहाई के बाद मेरे मां-बाप ने पाकिस्तान छोड़ दिया और कनाडा में रहने लगे। पाकिस्तान की सेना वहां के युवाओं पर जुल्म ढहा रही हैं वहां बच्चों के लिए कोई स्कूल नहीं हैं। पाकिस्तान आतंकियों का देश है।"