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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 14, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ओडिशा: भाजपा के बड़े लक्ष्य की तैयारी का आधार बनेगा भुवनेश्वर

By Kishor JoshiEdited By:
Published: Fri, 14 Apr 2017 08:59 AM (IST)Updated: Fri, 14 Apr 2017 09:26 AM (IST)

शनिवार से दो भारतीय जनता पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भुवनेश्वर में शुरू होगी।

ओडिशा: भाजपा के बड़े लक्ष्य की तैयारी का आधार बनेगा भुवनेश्वर
ओडिशा: भाजपा के बड़े लक्ष्य की तैयारी का आधार बनेगा भुवनेश्वर

नई दिल्ली (जेएनएन)।  पंचायत चुनाव में बड़ी जीत के बाद भाजपा ओडिशा में राजनीति के इसी प्रभावी मिक्सचर का भरपूर उपयोग करती दिख सकती है। शुरूआत शनिवार से प्रारंभ हो रही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ही दिख सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो सौ साल पहले हुए स्वतंत्रता के संभवत: पहली लड़ाई पाइका विद्रोह के योद्धाओं के परिवारों से मिलेंगे। जबकि बैठक के अंदर उत्तर प्रदेश की बड़ी जीत की याद दिलाते हुए पूर्वी और तटीय भारत में इसे दोहराने का लक्ष्य दिया जा सकता है।

लगभग दो दशक बाद ओडिशा में होने जा रही भाजपा कार्यकारिणी का राजनीतिक महत्व अहम माना जा रहा है। दरअसल इसे 2019 की बड़ी लड़ाई के संदर्भ में देखा जा रहा है। भाजपा का दूरदर्शी नेतृत्व पहले ही यह लक्ष्य तय कर चुका है कि पूर्वी और तटीय राज्यों में पड़ने वाली लगभग पौने दो सौ लोकसभा सीटों मे से आधी भाजपा को जीतनी है। यही कारण है कि डेढ़ साल पहले शुरू हुए सदस्यता अभियान में भी इन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

नतीजा भी दिखा था जब पारंपरिक रूप से कमजोर राज्यों में भी भाजपा की सदस्यता कईगुना तक बढ़ी थी। ओडिशा के पंचायत चुनाव और फिर गुरुवार को आए सात राज्यों के उपचुनावों ने यह स्थापित कर दिया है कि कदम सही दिशा मे बढ़े हैं। ओडिशा कार्यकारिणी में इसे और तेज करने की कोशिश होगी। बताते हैं कि भुवनेश्वर में कार्यकारिणी स्थल में फोटो और झलकियों में भाजपा की बढ़ती ताकत का अहसास कराया जाएगा। व

हीं बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का सार भी यही होगा कि 'थके बिना आगे बढ़ना ही जीत का मंत्र है और माध्यम है युवा सोच व गरीब कल्याण।' ध्यान रहे कि पश्चिम बंगाल ओडिशा का पड़ोसी राज्य है और बंगाल विधानसभा में छोटी ताकत होने के बावजूद भाजपा मजबूत विपक्ष के तौर पर उभरने लगी है। स्थानीय आत्मबल और गौरव का आह्वान भाजपा की रणनीति का एक हिस्सा होगा। आने वाले दिनों में खुद शाह ओडिशा के उन क्षेत्रों में सघन दौरा कर सकते हैं जहां अभूतपूर्व पंचायत चुनाव में भी भाजपा कमजोर दिखी थी। जाहिर है कि शनिवार से शुरू हो रही दो दिवसीय कार्यकारिणी का प्रभाव क्षेत्र बहुत बड़ा हो सकता है।

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