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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 06, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब अमेरिका खोजेगा एईएस का वायरस

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Published: Sat, 06 Sep 2014 01:32 PM (GMT+05:30)Updated: Sat, 06 Sep 2014 01:33 PM (GMT+05:30)

पूवरंचल में बच्चों के लिए यमदूत बने एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के वायरस की पहचान अब अमेरिकी वैज्ञानिक करेंगे। वे ...और पढ़ें

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लखनऊ (परवेज अहमद)। पूवरंचल में बच्चों के लिए यमदूत बने एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के वायरस की पहचान अब अमेरिकी वैज्ञानिक करेंगे। वे इसके फैलने की वजहें भी तलाशेंगे और फिर केंद्र तथा राच्य सरकार को उस पर काबू करने के उपाय सुझाएंगे। अमेरिका के सेंटर्स फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का सात सदस्यीय दल 15 सितम्बर से इस पर शोध शुरू करेगा।

इंसेफ्लाइटिस (जेई व एई) से पूवरंचल को मुक्त करने के केंद्र व राच्य सरकार के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। मोबाइल अस्पताल से लेकर विशेष चिकित्सा सुविधाओं के बावजूद हर दिन मासूम इस बीमारी से मौत के मुंह में समा रहे हैं। बड़ी संख्या में बच्चे अपाहिज हो रहे हैं। वर्ष 2005 से शुरू हुए जापानी बुखार के प्रकोप पर काबू करने के प्रयास तेज हुए तो वायरस ने रूप बदल लिया जिसकी पहचान एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) के रूप में हुई। मच्छरों से फैलने वाली इस बीमारी में कौन सा वायरस है। वह इतनी तेजी से क्यों फैलता है। कारण क्या हैं, इसकी खोज में नाकामी के बाद राच्य सरकार ने अमेरिकी सरकार के अधीन कार्यरत सीडीसी अटलांटा के वैज्ञानिकों से मदद मांगी थी।

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविंद कुमार ने उन्हें शोध के लिए संसाधन व डाटा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था, लेकिन वित्तीय मदद देने में असमर्थता जतायी थी। सीडीसी के वैज्ञानिकों ने बिना किसी वित्तीय मदद के वायरस खोजने का प्रयास करने पर सहमति जतायी थी। सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी दल में डॉ. कायला लेजरशन, संचारी रोग के विशेषज्ञ जेम्स जे. सजेवार, डॉ.पदमनी श्रीकांतइया, डा.शेखशाह हुसैन समेत सात सदस्य होंगे। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि सरकार बीमारी की रोकथाम में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। वायरस का पता लगाने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिकों को शोध की इजाजत दी गयी है। उन्हें मरीजों की लिखी जा रही दवा के कम्पाउंड को परखने और बीमारी प्रभावित इलाकों में दौरा करने की इजाजत दी गयी है। ये वैज्ञानिक अक्टूबर में शुरुआती रिपोर्ट राच्य और केंद्र सरकार को सौंपेंगे।

वर्ष- भर्ती मरीज-मृत्यु-मृत्यु प्रतिशत

2005 3532 937 26.52

2006 1940 431 22.21

2007 2423 516 21.29

2008 2194 458 20.87

2009 2663 525 19.71

2010 3303 514 15.56

2011 3308 627 18.95

2012 2517 527 20.86

(आंकड़ों के स्त्रोत : स्वास्थ्य विभाग)

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