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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 14, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

2014 से ही प्रभावी होगा भूमि अर्जन विधेयक

By Sachin MishraEdited By:
Published: Mon, 14 Aug 2017 02:25 PM (IST)

राज्य सरकार ने अब भूमि अर्जन कानून में संशोधन की पहल की है।

2014 से ही प्रभावी होगा भूमि अर्जन विधेयक
2014 से ही प्रभावी होगा भूमि अर्जन विधेयक

प्रदीप सिंह, रांची। काफी हो-हंगामे के बाद पिछले दिनों सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव वापस लेने वाली राज्य सरकार ने अब भूमि अर्जन कानून में संशोधन की पहल की है। इस संशोधन के बाद जहां विकास योजनाओं के लिए अधिग्रहीत होने वाली जमीन के सामाजिक प्रभावों का मूल्यांकन नहीं होगा, वहीं इसे बैकडेट यानी एक जनवरी 2014 से ही प्रभावी बनाने का प्रस्ताव है।

बैकडेट से कानून को प्रभावी बनाने की सरकार की पहल में तकनीकी पेंच फंस सकता है। झामुमो ने सरकार की इस मंशा की ओर राज्यपाल का ध्यान आकृष्ट कराया है।

जानकारों के मुताबिक, किसी विधेयक को बैकडेट से प्रभावी करना संभव नहीं है। बताते चलें कि बीते पांच अगस्त को इस संशोधन पर कैबिनेट ने जहां अपनी सहमति दी थी, वहीं 12 अगस्त को झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र से भी इसे पारित कर दिया गया।

संशोधन के मसौदे पर गौर करें तो विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, अस्पताल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, रेल, सड़क, जलमार्ग, विद्युतीकरण, सिंचाई, जलापूर्ति पाइपलाइन, टांसमिशन लाइन तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बनाई जानेवाली आवासीय इकाइयों के लिए ही इस संशोधन के तहत भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।

यह सारी प्रक्रिया ग्रामसभा के माध्यम से संचालित होगी। भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुन‌र्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार कानून-2013 में इससे पूर्व गुजरात, गोवा, तेलंगाना आदि राज्यों ने भी वहां की जरूरतों के हिसाब से संशोधन किया है।

विधि विभाग की सहमति से फैसला:

सरयूसंसदीय कार्यमंत्री सरयू राय का तर्क है कि कोई भी प्रस्ताव तैयार होने के पहले सरकार विधि विभाग की राय लेती है। मंतव्य लेने के बाद हीं इसे राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लाया गया होगा। उनकी जानकारी के मुताबिक किसी विधेयक को बैकडेट से लागू नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कैबिनेट में पारित प्रस्ताव का अध्ययन करने की बात कही। सरयू राय ने कहा कि विधि विभाग ने तमाम कानूनी प्रावधानों की जांच-परख करने के बाद ही प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का निर्णय दिया होगा। अगर कोई इस पर आपत्ति करेगा तो सरकार जवाब देगी।

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सामान्यत: कानून लागू होने की तिथि से प्रभावी होता है। बैक डेट से इसके प्रभावी करने का कोई औचित्य नहीं है। इससे इस संभावना को बल मिलता है कि बैक डेट से चल रही कुछ योजनाओं या किसी खास व्यक्ति या समूह को उपकृत करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

-सुखदेव भगत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

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