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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राजनीति नहीं आदिवासियों की बात कर गए अमित शाह

By Sachin MishraEdited By:
Published: Mon, 18 Sep 2017 09:43 AM (IST)Updated: Mon, 18 Sep 2017 09:45 AM (IST)

अमित शाह ने राजनीति से दूर सिर्फ आदिवासी, आदिवासियत व विकास के इर्द-गिर्द अपने भाषण को संयमित रखा।

राजनीति नहीं आदिवासियों की बात कर गए अमित शाह
राजनीति नहीं आदिवासियों की बात कर गए अमित शाह

राज्‍य ब्‍यूरो, रांची। भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह अपने तीन दिवसीय झारखंड प्रवास के अंतिम दिन खूंटी में बिरसा मुंडा की पावन धरती उलिहातू स्‍िथत हाईस्‍कूल मैदान से आदिवासियों के दिल तक दस्‍तक देने में सफल रहे। शहीद ग्राम विकास योजना के तहत राज्‍य के 19 गांवों के लिए विकास योजनाआें के शिलान्‍यास के बाद उन्‍होंने राजनीति से दूर सिर्फ आदिवासी, आदिवासियत और विकास के इर्द-गिर्द अपने भाषण को संयमित रखा। विपक्ष और विपक्षी पार्टियों का नाम तक नहीं। रघुवर को बेहतर काम के लिए शाबाशी जरूर दे गए।

खूंटी में भाजपा अध्‍यक्ष का संबोधन राजनीति से इतर देश अौर झारखंड के अांदोलन में आदिवासियों की भूमिका पर रहा। उन्‍होंने अपने 11 मिनट के भाषण में 8 मिनट से अधिक समय आदिवासियों और समाज के स्‍वतंत्रता सेनानियों का समर्पित किया। खासकर बिरसा मुंडा पर केंद्रित उनके विचारों ने मुंडा के वंशजों को भी झकझोरा। शाह ने कहा कि 25 वर्ष की उम्र में बिरसा वह काम कर गए जो हजारों वर्षों तक करोड़ों लोगों को प्रेरणा देने का काम करेगा। न केवल झारखंड बल्कि पूरा राष्‍ट्र बिरसा मुंडा ऋणी है।

बचपन से ही बिरसा ने आजादी के सपने देखे और इसको पूरा किया। नजदीक की पहाड़ी से ही उन्‍होंने मुंडा सेना बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पकड़े जाने के बाद भी उनके खिलाफ साजिशें हुईं, लेकिन वे विचलित नहीं हुए। आंदोलन जारी रही। आजादी के रणबांकुरों में बिरसा मुंडा का नाम पहला है। उनके संबोधन के क्रम में कई बार तालियां बजीं। हालांकि इसके लिए माहौल बनाने का काम पूर्व मुख्‍यमंत्री अर्जुन मुंडा ने किया, जिन्‍होंने मुंडारी भाषा में ओजपूर्ण भाषण से भीड़ में ऊर्जा भर दी थी। उनकी बात भले ही मंचासीन अधिसंख्‍य लोगाें की समझ से दूर रहीं, भावनाएं जन-जन तक पहुंची।

अमित शाह ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए बिरसा की धरती पर मौजूदगी के लिए खुद को भाग्‍यशाली बताया। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री का जन्‍मदिन जिसे देश के करोड़ों लोग सेवा दिवस के रूप में मना रहे हैं और स्‍वच्‍छता के लिए संकल्‍प ले रहे हैं उसकी शुरुआत करने के लिए इससे पावन धरती पूरे देश में नहीं है। उन्‍होंने देश की आजादी के लिए अपनी आहुति देने वाले 19 लोगों के गांवों में विकास योजनाओं का शिलान्‍यास करने का अवसर मिलने के लिए भी खुद को भाग्‍यवान बताया।

किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बगैर कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी इन गांवों में मूलभूत सुविधाओं का नहीं होना बताता है कि इनकी कितनी अनदेखी हुई, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सड़क, बिजली, पानी, पक्‍का अावास समेत अन्‍य मूलभूत सुविधाओं के लिए मार्ग प्रशस्‍त हो चुका है। उलिहातू में उन्‍होंने गृह निर्माण योजना काे लेकर भूमिभूजन में भी भाग लिया। परिसर में पौधरोपण भी किया गया।

बिरसा मुंडा और गया मुंडा के नेतृत्‍व में हुए संघर्ष, नीलांबर-पीतांबर का योगदान सिधो-कान्‍हू व दिवा किसुन के बलिदान की भी उन्‍होंने चर्चा की। उन्‍होंने रघुवर दास को प्रधानमंत्री के उस घोषणा को पूरा करने का बीड़ा उठाने के लिए धन्‍यवाद दिया, जिसमें उन्‍होंने आजादी के 75 वर्ष पूरा होने तक सभी स्‍वतंत्रता सेनानियों के गांव को पूर्ण विकसित कराने की बात कही थी। ऐसे सेनानियाें के गांवों में बिजली, पानी, गैस कनेक्‍शन, सड़क पहुंचाकर भाजपा ने सच्‍ची श्रद्धांजलि दी है। ऐसा नहीं होता तो हम उनके तर्पण में बहुत पीछे रह जाते।

शाह ने कहा कि समय कम रहने के कारण हेलीकॉप्‍टर से बिरसा के गांव आया हूं, लेकिन आसमान से आदिवासी इलाकों और जंगलों में चमचमाती सड़कें देखकर मन खुश हो गया। वास्‍तव में सरकारें इसलिए ही होती हैं। अब झारखंड में रहने वाले हमारे आदिवासी भाइयों को भी आजादी का फल मिलेगा। अंत में उन्‍होंने स्‍वराज को सुराज बनाने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का संकल्‍प पूरा करने में सबके सहयोग की अपील की। साथ ही. कार्यक्रम के दौरान शहीदों के जीवन पर केंदित पुस्तिका को सभी से पढ़ने का आह्वान कर गए।⁠⁠⁠⁠ 

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