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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 29, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

एमजीएम में 166 बच्चों की मौत, विशेषज्ञों की टीम करेगी जांच

By Sachin MishraEdited By:
Published: Tue, 29 Aug 2017 09:47 AM (IST)Updated: Tue, 29 Aug 2017 04:49 PM (IST)

एमजीएम अस्पताल में चार महीने में 164 बच्चों की मौत के मामले में सरकार ने मामले की जांच का आदेश दिया है।

एमजीएम में 166 बच्चों की मौत, विशेषज्ञों की टीम करेगी जांच
एमजीएम में 166 बच्चों की मौत, विशेषज्ञों की टीम करेगी जांच

जमशेदपुर, जेएनएन। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज में पिछले चार माह में 166 बच्चों की मौत के मामले में सरकार ने जांच का आदेश दिया है। मंगलवार को जमशेदपुर पहुंचीं राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि विशेषज्ञों की टीम पूरे मामले की जांच करेगी। राज्य में नक्सल व कुपोषण बड़ी समस्या है।

द्रौपदी मुर्मू ने इस्कॉन के सेंट्रल किचन का निरीक्षण किया। इस किचन में जमशेदपुर व आसपास के स्कूलों के बच्चों के लिए मिड डे मिल तैयार की जाती है।

बच्चों की मौत प्रकरण की जांच को प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद मंगलवार को एमजीएम अस्पताल पहुंचे। उन्‍होंने कहा कि बच्‍चों को ऐसे मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। एमजीएम अधीक्षक से रिपोर्ट तलब। मौत प्रकरण पर आज दूसरे दिन भी अनशन पर बैठेंगे कांग्रेसी। कांग्रेस की ओर से आज हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की जा सकती है। 

बीते दो दिनों में एमजीएम अस्पताल में दो और बच्चों की मौत हो गई। 26 अगस्त को एनआइसीयू (न्यू बोर्न इंटेसिव केयर यूनिट) में एक नवजात की मौत हो गई। इसका मुख्य कारण नवजात का वजन कम होना है।

वहीं, रविवार को एचआइवी से पीडि़त एक नौ वर्षीय किशोर की मौत वार्ड में हो गई, जबकि बीते चार माह में कुल 166 बच्चों ने अपनी जान इस अस्पताल में गवां दी है। सबसे अधिक जुलाई माह में कुल 60 बच्चों की मौत हुई है। इस हैरान करने वाले आंकड़ों को सबसे पहले दैनिक जागरण ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने जांच का आदेश दिया है।

दैनिक जागरण ने 22 अगस्त के अंक में इसका खुलासा किया था। इस पर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद जमशेदपुर सिविल कोर्ट के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद मंगलवार को एमजीएम अस्पताल गए और डाक्टरों से मामले की जानकारी हासिल की। एमजीएम अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद वह इसकी रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंपेंगे।

एनआइसीयू के दो वार्मर खराब, चार में 11 बच्चे भर्ती

एनआइसीयू में कुल छह वार्मर हैं। इसमें से दो खराब हैं। चार में 11 बच्चे भर्ती हैं। यानी एक-एक वार्मर पर तीन-तीन बच्चे भर्ती हैं। यह बच्चे अलग-अलग बीमारियों से ग्रस्त हैं। इसलिए एक-दूसरे में संक्रमण फैलने की संभावना काफी अधिक रहती है। चिकित्सकों का कहना है कि संसाधन की अपेक्षा मरीजों की संख्या काफी अधिक है। किसी को लौटाया नहीं जा सकता। मजबूरी में किसी तरह इलाज किया जा रहा है।

25 अगस्त तक कुल 1867 मरीज हुए भर्ती

माह भर्ती मौत

मई 378 31

जून 473 32

जुलाई 546 60

यह बताया जा रहा मौत का कारण

-कम वजन के बच्चों का जन्म। 200 ग्राम तक होता है वजन।

- गर्भवती का सही देखरेख नहीं हो पाना। इससे जच्चा-बच्चा दोनों की मौत होती है।

- एनीमिया (खून की कमी) व कुपोषण।

- गर्भवती के दौरान महिलाओं का नियमित रूप से जांच नहीं हो पाना।

- संस्थागत प्रसव बढ़ने से सही आंकड़ा आ रहा सामने।

एमजीएम में बच्चों की मौत मामले में सरकार को नोटिस

राज्य ब्यूरो, रांची। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जमशेदपुर स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (एमजीएम) में एक माह के भीतर 52 बच्चों की मौत मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है।

सरकार को इसपर छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही, आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को बच्चों की होने वाली मौतों पर एहतियात कदम उठाने तथा इस संबंध में राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है।

यह सुनिश्चित भी करने का कहा है कि बच्चों के इलाज में किसी तरह की लापरवाही न हो। आयोग ने कहा है कि एमजीएम में एक माह के भीतर इतनी मौतें हुई हैं। अस्पताल अधीक्षक ने इन मौतों का कारण कुपोषण बताया है।  

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 एमजीएम अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले की जांच को पहुंचे जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय प्रसाद।