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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 28, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

एमजीएम अस्पताल में 164 बच्चों की मौत, आयोग ने भेजा नोटिस

By Sachin MishraEdited By:
Published: Mon, 28 Aug 2017 03:49 PM (IST)Updated: Mon, 28 Aug 2017 04:40 PM (IST)

जमशेदपुर के महात्‍मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में पिछले चार महीने में 164 बच्चों की मौत हो गई।

एमजीएम अस्पताल में 164 बच्चों की मौत, आयोग ने भेजा नोटिस
एमजीएम अस्पताल में 164 बच्चों की मौत, आयोग ने भेजा नोटिस

जमशेदपुर, जेएनएन। जमशेदपुर के महात्‍मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में पिछले चार महीने में 164 बच्चों की मौत होने का मामला सामने आया है। इस मसले पर जहां  राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। वहीं, कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। 

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सह पूर्व सांसद डॉ. अजय कुमार ने एमजीएम अस्पताल सह कॉलेज में पिछले चार महीने में हुई 164 बच्चों की मौत के लिए झारखंड सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कांग्रेस पार्टी सूबे के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव व एमजीएम अधीक्षक समेत एमजीएम के प्राचार्य के खिलाफ साकची थाने में प्राथमिकी दर्ज कराएगी। मासूमों की मौत के खिलाफ पार्टी साकची गोलचक्कर पर धरना देगी और धरने से सीधे साकची थाना जाकर इस मामले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएगी।

इस बीच, जमशेदपुर के महात्‍मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में 52 से अधिक शिशुओं की मौत पर संज्ञान लेते हुए राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। मानवाधिकार आयोग ने सरकार से सवाल किया है कि क्‍यों इतने शिशुओं की मौत हुई। शिशुओं की मौत के बाद अस्‍पताल ने अपनी व्‍यवस्‍था में सुधार नहीं किया।

डॉ. अजय कुमार रविवार को सर्किट हाउस एरिया में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चार माह में 164 व एक ही माह में 60 बच्चों की मौत की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री रघुवर दास व स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी को लेते हुए तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इस अस्पताल में कोल्हान समेत आस-पास के राज्यों के लोग भी निर्भर हैं।

एमजीएम अस्पताल में मई से अगस्त के बीच एनआइसीयू, पीआइसीयू व वार्ड में विभिन्न रोगों से ग्रस्त 1,867 बच्चों को भर्ती किया गया था। इनमें 164 की मौत हो गई। एनआइसीयू में सबसे अधिक 112 बच्चों की मौत (कुल 343 बच्चे भर्ती थे) हुई। अगस्त में इन तीनों जगहों पर कुल 470 बच्चों को भर्ती कराया गया था, जिनमें 41 की मौत हो चुकी है. पीआइसीयू में 110 बच्चों में 31 और वार्ड में 1410 में 21 बच्चों की मौत हो गई।

डॉ. अजय ने कहा कि बड़ी संख्या में नवजात शिशुओं को यहां इलाज के लिए लाया जाता है लेकिन इसके लिए जो इंतज़ाम हैं, वह आज तक न्यूनतम हैं। एमजीएम अस्पताल में खराब पड़े लाखों रुपये की मशीनें जंग खा रही है। बेकार रखे होने के कारण आधे से अधिक मशीन खराब हो गए हैं। इसी तरह, इमरजेंसी डिपार्टमेंट में करीब 1.5 करोड़ की लागत से तैयार मोड्यूलर ऑपरेशन थियेटर भी काम नहीं कर रहा है। 36 लाख की डिजास्टर ट्रॉली भी धूल फांक रही है।

मंत्री का बयान शर्मनाक:

डॉ. अजय कुमार ने कहा कि रिम्स (रांची ) में एक मानवता को शर्मसार करने वाली घटना घटी, जिसमें महज 50 रुपये की कमी की वजह से एक साल के मासूम श्याम की मौत हो गई। इस घटना पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने गैर जिम्मेदाराना बयान देकर अपनी मानसिकता जाहिर कर दी।

इस क्रम में पूर्व सांसद ने देश के अलग-अलग अस्पतालों में हुई मौत का जिक्र करते हुए भाजपा शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य सेवा चरमराने का आरोप लगाया। कहा कि भाजपा सरकार गाय बचाने को लेकर ज्यादा चिंतित है, जबकि बच्चे कुपोषण से मर रहे हैं। उन्होंने एमजीएम अस्पताल को अविलंब अपग्रेड करने की दिशा में पहल करने की जरूरत पर जोर दिया।

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