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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 25, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सुनारों के बाद छह उद्योगों को 138 करोड़ राहत की तैयारी

By Babita KashyapEdited By:
Published: Fri, 25 Aug 2017 09:49 AM (IST)

दो सुनारों व आइटी इंडस्ट्री पर मेहरबानी दिखाने के पीछे कथित तौर पर एक मंत्री के हित जुड़े हुए हैं। इसमें लेनदेन की बात भी खूब चर्चि

सुनारों के बाद छह उद्योगों को 138 करोड़ राहत की तैयारी
सुनारों के बाद छह उद्योगों को 138 करोड़ राहत की तैयारी

शिमला, प्रकाश भारद्वाज। गरीब हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने कार्यकाल खत्म होने से पहले दरियादिली दिखाना शुरू कर दी है। सुनारों के बाद अब सरकार ने छह आइटी उद्योगों का 138 करोड़ रुपये का टैक्स माफ करने की तैयारी कर ली है। इससे आर्थिक संकट से गुजर रहे प्रदेश पर और बोझ बढ़ जाएगा। सरकार ने प्रदेश के दो सुनारों से मिलने वाला 16 करोड़ रुपये का टैक्स माफ कर दिया है। अब उद्योगों को छूट देने से भी प्रदेश को एक पैसा नहीं आएगा। बेशक सरकार के आला अधिकारी के अडऩे से दो बार मंत्रिमंडल से छूट का मामला टर्न डाउन हो चुका है, लेकिन अगली कैबिनेट में मंजूरी देने के लिए फाइल तैयार हो चुकी है। दो सुनारों व आइटी इंडस्ट्री पर मेहरबानी दिखाने के पीछे कथित तौर पर एक मंत्री के हित जुड़े हुए हैं। इसमें लेनदेन की बात भी खूब चर्चित है। 

 

कहां है इसमें जनहित

सरकार ने एंट्री टैक्स वसूलने के निर्णय को पलटते हुए दो सुनारों को जनहित में राहत प्रदान की है। यहां सवाल यह उठता है कि सुनारों से ऐसा क्या जनहित प्रदेश के लोगों से जुड़ा था। 

 

पांच साल तक कहां थी सरकार

आइटी इंडस्ट्री को सीएसटी यानी सेंट्रल सेल्स टैक्स से मार्च 2013 तक छूट मिली थी और अब पांच साल गुजरने वाले हैं। अचानक टैक्स छूट का प्रस्ताव डलवाया गया और 15 हजार लोगों के बेरोजगार होने का हवाला दिया गया। सच्चाई यह है कि आइटी से रोजगार प्राप्त करने वाले हिमाचलियों की संख्या मात्र 600 है। आइटी विभाग ने सरकार को 33 करोड़ रुपये की छूट देने का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। अगले वर्ष छूट दिए जाने की रकम 138 करोड़ तक पहुंच जाएगी, जिसका सरकार को अपने राज्य के बजट से प्रावधान करना पड़ेगा। 

 

मंत्री बोले, मैं नहीं खाता पैसे

आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी का दो सुनारों का करोड़ों रुपये का टैक्स माफ करने के संदर्भ में कहना है कि प्रकाश चौधरी पैसा नहीं खाता है। एक सुनार ने टैक्स माफ करने के लिए आवेदन किया था। तर्क यह दिया गया था कि देश के दूसरे राज्यों में सोना रिफाइनरी कारोबारियों से एंट्री टैक्स नहीं

लिया जाता है। इसके आधार पर प्रदेश में भी एंट्री टैक्स से छूट का प्रस्ताव आया था।

 

16 करोड़ रुपये का टैक्स डकारने वाले प्रभात चौधरी व साईं मैसर्ज हैं सुनार

16 करोड़ का टैक्स डकारने वाले एक सुनार का संबंध नादौन से है तो दूसरे का परवाणू से। दोनों रोजाना 40 से 5  किलो सोना बेचते हैं। नादौन के प्रभात चौधरी को आठ करोड़ व इतनी ही रकम की परवाणू के साईं मैसर्ज को टैक्स में छूट दी गई है। दोनों सुनारों ने पांच साल से एंट्री टैक्स का भुगतान नहीं किया था।

जीएसटी लागू होने से पहले सरकार के आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से सुनारों से .1 फीसद एंट्री टैक्स वसूला जाता था। कुछ वर्ष पहले तक एक फीसद वैट लिया जाता था।

 

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