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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 24, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सीपीएस की कुर्सी तो गई और अब विधानसभा सदस्यता को खतरा

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Mon, 24 Jul 2017 10:47 AM (IST)

हरियाणा में हाई कोर्ट द्वारा हटाए गए चार मुख्‍य संसदीय सचिवाें के लिए अब नई मुसीबत आ सकती है। उनकी ...और पढ़ें

सीपीएस की कुर्सी तो गई और अब विधानसभा सदस्यता को खतरा
सीपीएस की कुर्सी तो गई और अब विधानसभा सदस्यता को खतरा

जेएनएन, चंडीगढ़। हाईकोर्ट के आदेश पर हटाए गए चारों मुख्य संसदीय सचिवों की मुश्किलें बढ़ सकती हैैं। आम आदमी पार्टी ने चारों विधायकों को लाभ के पद पर तैनात किए जाने को आधार बनाते हुए चुनाव आयोग और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उनकी विधानसभा से सदस्यता रद करने की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि 10 दिन में कोई कार्रवाई नहीं होने पर वह हाई कोर्ट जाएगी।

पार्टी प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने चुनाव आयोग और राष्ट्रपति को लिखे पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य संसदीय सचिवों को हर महीने 37 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री ने पौने दो करोड़ रुपये की स्वैच्छिक ग्रांट जारी की, जबकि विधायकों के लिए ऐसी किसी ग्रांट का प्रावधान नहीं है।

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उन्‍हाेंने कहा कि हर महीने इन्हें ढाई लाख रुपये से ज्यादा वेतन और अन्य सुविधाएं दी गर्इं। ऑफिस, घर, गाड़ी, सुरक्षा व स्टाफ की सुविधाएं अलग से मिली। इन पर करीब दस करोड़ रुपये खर्च हुए हैं जिनकी रिकवरी होनी चाहिए। यह जनता के पैसे का दुरुपयोग है।

जयहिंद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 191 के अनुसार लाभ का पद संभाल रहे विधायकों की सदयस्ता रद होनी चाहिए। हरियाणा विधानसभा की वेबसाइट पर एंटी-डिफेक्शन लॉ में भी इसका साफ उल्लेख है। इसी तरह के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट विधायकों की सदस्यता रद कर चुका है।

इन विधायकों से मांगा जा रहा इस्तीफा

हाईकोर्ट के आदेश के बाद असंध के विधायक बख्शीश सिंह विर्क, रादौर के विधायक श्याम सिंह राणा, बडख़ल की विधायक सीमा त्रिखा और हिसार के विधायक डॉ. कमल गुप्ता सीपीएस पद से इस्तीफे दे चुके हैैं।

सदस्यता बचाने के लिए ही सुप्रीम कोर्ट नहीं गई सरकार

नवीन जयहिंद ने कहा कि चारों विधायकों की सदस्यता बचाने के लिए ही सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी। अगर इन विधायकों की सदस्यता खत्म होती है तो भाजपा के 47 विधायकों में से सिर्फ 43 रह जाएंगे और उसे सत्‍ता में बने रहने के लिए निर्दलियों का सहारा लेना पड़ेगा। कांग्रेस और इनेलो सीबीआइ के डर से इस मामले को नहीं उठा रहीं।

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