विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 24, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जाट आंदोलन में मुरथल के पास 10 महिलाओं से दुष्‍कर्म पर हाई कोर्ट सख्‍त

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Wed, 24 Feb 2016 07:39 PM (IST)Updated: Wed, 24 Feb 2016 10:51 PM (IST)

जाट आंदोलन के दौरान सोनीपत के मुरथल के पास एनएच-1 पर उपद्रवियों द्वारा 10 महिला यात्रियों से बदसुलूकी व दुष्‍कर्म ...और पढ़ें

News Article Hero Image

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जाट आंदोलन के दौरान सोनीपत के पास मुरथल में जीटी रोड पर महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में कड़ा रुख दिखाया है। हार्इ कोर्ट के जस्टिस एनके सांघी ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया और इसे मुख्य न्यायाधीश को भेजकर इस मामले में कार्रवाई करने का आग्रह किया। मुख्य न्यायाधीश ने इस स्वत: संज्ञान पर त्वरित कार्रवाई करते हुए इसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। सबसे उल्लेखनीय बात है कि जनहित याचिका के तौर पर इस मामले में बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।

जज के स्वत: संज्ञान को मुख्य न्यायाधीश ने किया स्वीकार, जनहित याचिका के तौर होगी सुनवाई

सोमवार को तड़के उपद्रव मचा रहे लोगों ने हरियाणा के मुरथल के पास नेशनल हाईवे-1 पर सोमवार तड़के कुछ गाडिय़ों को रोका और उनमें सवार करीब 10 महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। जस्टिस सांघी ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक घटना है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर इस मामले में प्रशासन की तरह हाईकोर्ट भी अपनी आंखें बंद कर लेगा और इस पर संज्ञान नहीं लेगा तो यह उसके अपने कर्तव्य में विफल होने जैसा होगा। इस मामले की देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी से जांच होनी चाहिए।

पढ़ें : डीजीपी सिंघल करेंगे मुरथल में महिलाओं से दुराचार की जांच

जस्टिस सांघी ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को आदेश दिया कि वह उनके संज्ञान को कार्यवाहक चीफ जस्टिस भेजें ताकि इस पर जनहित याचिका की तरह सुनवाई हो सके। जस्टिस सांघी ने कहा कि जब उन्हें इस बारे में पता चला और यह समाचार पढ़ा तो उनको बहुत दुख हुआ। सबसे अधिक दुख तो अधिकारियों के रवैये से हुआ।

पढ़ें : हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार प्रो. वीरेंद्र सहित नौ पर राजद्रोह का केस

उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस खूंखार वारदात को अफवाह करार दिया, लेकिन चश्मदीदों के मुताबिक 10 महिलाओं का यौन शोषण कर उन्हें खेतों में छोड़ दिया गया। इससे भी खौफनाक यह कि जिला प्रशासन ने यहां भी पीडि़तों और उनके परिवारों को अपने सम्मान की खातिर रिपोर्ट दर्ज न कराने को कहा। यह प्रथमदृष्टया बहुत ही घिनौना लग रहा है।

उन्होेंने कहा कि समाचार के मुताबिक, सोमवार तड़के 30 से अधिक बदमाशों ने एनसीआर की तरफ जाने वाले वाहनों को रोका और कई वाहनों को आग लगा दी।। कई लोग जान बचाकर भागे, लेकिन अचानक हुई इस हमले से कुछ महिलाएं नहीं भाग पाईं। इसके बाद बदमाशों ने इन महिलाओं से बदतमीजी शुरू कर दी अौर उनके कपड़े फाड़ दिए। बदमाशों ने उनके साथ दुष्कर्म भी किया।

जस्टिस समाचार के अनुसार, इस खौफनाक वारदात की पीडि़त महिलाएं अपने परिजनों के आने तक खेतों में पड़ी रहीं। इसके बाद जीटी रोड के पास के गांव हसनपुर और कुराड़ के लोग कपड़े और कंबल लेकर आए और इन महिलाओं तन ढकने के लिए दिया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के कई अधिकारी भी आ वहां गए, लेकिन आरोप है कि मामले की जांच या पीडि़तों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय परिजनों पर महिलाओं को घर ले जाने का दबाव बनाया गया।

जस्टिस सांघी ने कहा कि इस तरह की घटना शर्मसार करने वाली है उससे ज्यादा शर्मिंदा करने वाली करतूत पुलिस अधिकारियों की है। जस्टिस सांघी ने इस मामले पर संज्ञान लेकर कार्यवाहक चीफ जस्टिस को कड़ा कदम उठाने का आग्रह किया है।