यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 06, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इमेज बदलने पर जोर
सन 1

मुंबई। सन 1956 यानी 'देवदास' की रिलीज तक दिलीप कुमार ट्रेजडी किंग की इमेज में रहे, पर यह दिलीप कुमार को व्यक्तिगत तौर पर काफी परेशान करती रही। उन दिनों को याद करते हुए वे कहते हैं, 'मुझे मानसिक तौर पर काफी समस्या होने लगी थी। मैं उस इमेज से छुटकारा पाना चाहता था। उसकी खातिर मैं नामचीन मनोचिकित्सक डॉक्टर वुल्फ से मिला। वे बेहद वरिष्ठ चिकित्सक थे। उनके अलावा हिंदुस्तान के बड़े मनोचिकित्सकों के भी संपर्क में मैं रहा। सबने मुझे आगे हल्के-फुल्के कॉमेडी रोल करने की सलाह दी।' उसी दौरान साउथ के फिल्मकार एम एम एस नायडू हिंदी फिल्म जगत में भी स्थापित नाम बनना चाहते थे। वे मुंबई आए और उस वक्त के सुपरस्टार दिलीप कुमार को साइन करने की जुगत में भिड़ गए। वे दिलीप कुमार को अपनी तमिल फिल्म 'मलाई-के- कलन' की रिमेक में कास्ट करना चाहते थे। उस फिल्म का किरदार काफी हद तक 'आन' में दिलीप कुमार के निभाए गए किरदार से मिलता-जुलता था। दिलीप कुमार शुरू में तो वह फिल्म नहीं करना चाहते थे, पर बाद में उन्हें अपने डॉक्टरों की सलाह याद आ गई कि उन्हें इमेज मेकओवर करनी है, तो ट्रेजिक भूमिकाओं से इतर रोल करने होंगे। उन्होंने नायडू को हां कहा और इस तरह 'आजाद' का आगाज हुआ। फिल्म ने जमकर कमाई की। दिलचस्प बात यह थी कि इस फिल्म में ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार और ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी थे, पर दर्शकों ने इन्हें कॉमेडी भूमिका में भी आसानी से स्वीकार किया।
उसके बाद तो दिलीप कुमार का साउथ के फिल्म जगत से संबंध और गहरा हो गया। वहां के फिल्मकारों के निर्देशन में वे और भी हिंदी फिल्में करने लगे। उनका मुंबई से ज्यादा वक्त मद्रास में गुजरने लगा। 'आजाद' के बाद साउथ के ही एक और फिल्मकार के साथ उन्होंने 'इंसानियत' की। उस फिल्म में उनके साथ संवाद अदायगी के जादूगर राज कुमार भी थे।
बहरहाल, उन्हीं दिनों 'देवदास' की एडिटिंग चल रही थी। उस काम को ऋषिकेश मुखर्जी अंजाम दे रहे थे। दिलीप उनकी तल्लीनता से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने ऋषि दा से कहा कि वे निर्देशन क्यों नहीं करते? ऋषि दा ने बिना उनकी तरफ देखे कहा, पर पैसे कौन लगाएगा? इस पर दिलीप कुमार ने उनसे कहानी सुनाने को कहा। ऋषिकेश मुखर्जी ने उन्हें 'मुसाफिर' की कहानी सुनाई। दिलीप कुमार उस फिल्म को करने के लिए मान गए। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस फिल्म के लिए पैसे नहीं लेंगे। ऋषि दा बहुत खुश हुए और दिलीप कुमार के नाम पर मार्केट से उन्हें पैसे भी फाइनेंस हो गए।
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दिलीप कुमार की फिल्मों का अगला दशक उनकी व वैजयंती माला की ऑन स्क्रीन जोड़ी के नाम रहा। दोनों ने कमाल की सात फिल्में 'देवदास', 'नया दौर', 'मधुमती', 'पैगाम', 'गंगा जमुना', 'लीडर' और 'संघर्ष' किया। हालांकि उन दिनों दिलीप कुमार और मधुबाला के रोमांस की खबरें जोरों पर थीं। साथ ही मीडिया में दिलीप कुमार की इमेज मूडी कलाकार की, सो वैजयंती माला सशंकित थीं कि पता नहीं सेट पर उनके साथ दिलीप कुमार का व्यवहार कैसा रहेगा, लेकिन संयोग से दिलीप कुमार और मधुबाला का रोमांस ज्यादा दिनों तक नहीं चला। वह दिलीप कुमार की फिल्मों की तरह ट्रेजिक ऐंड पर खत्म हुआ।
क्रमश:
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