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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 21, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

..जब सचिन को लगा कठिन है टेस्ट क्रिकेट

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Published: Mon, 21 Oct 2013 08:57 AM (IST)Updated: Mon, 21 Oct 2013 09:02 AM (IST)

ईरानी ट्रॉफी (1

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जागरण न्यूज नेटवर्क, मुंबई। ईरानी ट्रॉफी (1989) में शेष भारत की ओर से पदार्पण मैच में शतक लगाने वाले सबसे युवा भारतीय (16 साल, 197 दिन) बल्लेबाज बनने के बाद सचिन को पाकिस्तान दौरे के लिए टीम में जगह दी गई। राजसिंह डूंगरपुर की अध्यक्षता वाली चयन समिति इस बात पर एकमत नहीं थी कि क्या यह सोलह साल के सचिन के लिए टेस्ट क्रिकेट की दुनिया में प्रवेश करने का सही समय है। वह भी पाकिस्तान के खिलाफ जहां भारत ने कभी भी टेस्ट मैच नहीं जीता था। समिति में खिलाड़ी गुंडप्पा विश्वनाथ, नरेन तम्हाने, रमेश सक्सेना और आकाश लाल थे। पूर्व विकेटकीपर तम्हाने ने यह कहकर गतिरोध समाप्त किया, 'सचिन कभी फेल नहीं होता।'

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उसके बाद सबसे बड़ा सवाल था कि क्या टीम प्रबंधन उन्हें कराची में खेले जाने वाले पहले टेस्ट में एकादश में जगह देगा। 15 नवंबर को सचिन का भारतीय खिलाड़ी के तौर पर मैदान में उतरने का सपना साकार हुआ। उनको इंडिया कैप उस समय मैनेजर रहे चंदू बोर्डे ने पहनाई थी। बाद में उन्होंने इस बारे में बताया था कि यह मेरे जीवन का यादगार पल था। पहले दिन के खेल के बारे में सचिन ने कहा था, 'मैं बुरी तरह थक गया था। सामान्य तौर पर आप होटल आते हैं और चाय पीते हैं, लेकिन मैं शाम छह बजे सो गया और नौ बजे उठा। डिनर करके मैं दोबारा सो गया था।'

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पहले दिन पाकिस्तान ने चार विकेट पर 259 रन बनाए। अगले दिन मेजबान टीम 409 रन पर आउट हो गई और जवाब में भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। 41 रन पर चार विकेट खोने के बाद सचिन मुहम्मद अजहरुद्दीन का साथ देने आए। पदार्पण कर रहे सचिन की पहली परीक्षा जोरदार फॉर्म में चल रहे वसीम अकरम ने ली, जबकि वकार यूनुस ने उनको 15 रन पर बोल्ड कर दिया। अपनी 24 गेंद की पारी के बाद युवा बल्लेबाज को महसूस हुआ कि टेस्ट क्रिकेट वाकई मुश्किल है। बाद में सचिन को रवि शास्त्री ने आश्वस्त किया कि समय के साथ तुम भी ढल जाओगे। सचिन ने फैसलाबाद टेस्ट में पहला अर्धशतक लगाया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। उसके बाद की कहानी तो पूरी दुनिया जानती है। (मिड-डे)

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