यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 18, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
क्रिकेट में ही नहीं समाजसेवा में भी चैंपियन हैं सचिन
क्रिकेट के मैदान पर बेशुमार रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके सचिन तेंदुलकर समाजसेवा में भी पीछे नहीं रहे हैं और ...और पढ़ें

नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान पर बेशुमार रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके सचिन तेंदुलकर समाजसेवा में भी पीछे नहीं रहे हैं और पिछले कई साल से मुंबई की झुग्गियों में बच्चों के लिए कार्यरत एनजीओ 'अपनालय' से जुड़े हैं। अपनालय से सचिन का नाता उतना ही पुराना है जितना उनकी पत्नी अंजलि से। दरअसल, अंजलि की मां अनाबेल मेहता ही यह एनजीओ चलाती हैं और उनसे ही सचिन को इससे जुड़ने की प्रेरणा मिली।
मेहता ने साक्षात्कार में कहा कि सचिन जब से हमारे घर आने लगे, उन्होंने मुझे अपनालय की बैठकों के लिए दौड़ते देखा। अपने पिता के निधन के बाद वह इस संस्था से जुड़े और स्कूल जाने वाले बच्चों के प्रायोजन का जिम्मा लिया।
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उन्होंने कहा कि मैंने शायद ही उनसे मदद मांगी हो, लेकिन जब भी मदद की जरूरत पड़ी या तो उन्होंने हमें सही लोगों तक पहुंचाया या बल्ले, टिकट नीलामी के लिए दिए या हमारे लिए किसी कार्यक्रम में बोले। उन्होंने पहली मुंबई मैराथन में हमारे लिए भाग लेने पर भी रजामंदी जताई थी, लेकिन मुंबई पुलिस ने उन्हें भाग नहीं लेने दिया। मेहता ने कहा, 'इस साल सचिन और अपनालय दोनों ने अपनी 40वीं वषगरंठ मनाई। उम्मीद है कि यह साथ आगे भी बना रहेगा। अपनालय के बच्चे सचिन के क्रिकेट को अलविदा कहने से दुखी हैं, लेकिन उन्हें इस चैंपियन बल्लेबाज का 200वां और आखिरी टेस्ट देखने वानखेड़े स्टेडियम ले जाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।'
उन्होंने कहा कि अपने व्यस्त कार्यक्रम के कारण भले ही सचिन अपनालय ज्यादा नहीं आ पाते, लेकिन मदद को हमेशा उपलब्ध रहते हैं। इसके अलावा उनकी मौजूदगी से भीड़ को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है, खासकर भीड़भरी उस झुग्गी में जहां अपनालय कार्यरत है।
मूल रूप से ब्रिटेन की रहने वालीं मेहता क्रिकेट की शौकीन हैं और सचिन को महानतम खिलाड़ियों में मानती हैं साथ ही वह मानती हैं कि सचिन एक बेहतरीन इंसान भी हैं। उन्होंने कहा, 'सचिन सर्वकालिक महानतम क्रिकेटरों में से हैं, लेकिन मेरे लिए अधिक अहम यह है कि वह बेहतरीन इंसान हैं। सभी को एक न एक दिन रिटायर होना है और वह इसके लिए अभी तैयार थे। वह भले ही अब क्रिकेट न खेलें, लेकिन बेहतरीन इंसान वह हमेशा रहेंगे। सचिन अपने पिता से काफी प्रभावित रहे हैं और मजबूत पारिवारिक मूल्यों के साथ उनकी परवरिश हुई है। मुझे उनसे बेहतर दामाद नहीं मिल सकता था।
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