यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 21, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'सचिन की वो 175 रनों की पारी आज भी याद आती है'
बात सितंबर, 1986 की है। कानपुर में अंडर-17 इंटर जोनल टूर्नामेंट में मैं ईस्ट जोन का प्रतिनिधित्व कर रहा था। ...और पढ़ें

(सुनील कुमार)
बात सितंबर, 1986 की है। कानपुर में अंडर-17 इंटर जोनल टूर्नामेंट में मैं ईस्ट जोन का प्रतिनिधित्व कर रहा था। वेस्ट जोन के खिलाफ मैच से पूर्व नेट्स पर पहुंचा तो वहां मुझसे लगभग दो साल छोटा सचिन बगैर ग्लव्स के नॉकिंग कर रहा था। इस दौरान आड़ा-तिरछा जैसे मन कर रहा था, स्ट्रोक लगा रहा था। लेकिन मैच में वही सचिन एकदम बदला क्रिकेटर नजर आया। तब मुझे लगा कि क्यों मैच से कुछ दिन पूर्व मुंबई में संदीप पाटिल ने अपने कॉलम में लिखा था कि इस खिलाड़ी में एक्सट्रा टैलेंट है। बेमिसाल थी सचिन की 175 रन की वह पारी, जो मेरी समझ में उनके करियर का टर्निग प्वाइंट भी साबित हुई।
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ईस्ट जोन की ओर से उस मैच में मैंने भी 83 रन बनाए थे। वेस्ट जोन की टीम जब क्षेत्ररक्षण करने मैदान में जा रही थी तो सचिन मेरे पास आए और मुझसे अदब से कहा कि सुनील भाई क्या विनोद के लिए मुझे कीपिंग पैड देंगे। उनका यह रूप यह दिखाता है कि वह दोस्तों की मदद को हमेशा तैयार रहते थे। वेस्ट जोन की टीम वह मैच हार गई, लेकिन सचिन अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे। इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन के आधार पर कोलकाता में मार्च-अप्रैल, 1987 में भारतीय टीम का कैंप लगा। उस कैंप के लिए विनोद कांबली, सौरव गांगुली, अजय जडेजा, अनिल कुंबले, सचिन और मुझ समेत 30 खिलाड़ियों का चयन हुआ था। लेकिन प्रथम श्रेणी में व्यस्त रहने से सचिन कैंप में नहीं आ सके।
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इसके बाद 1990 में मोइनदौला गोल्ड कप में टिस्को की ओर से खेलने मैं हैदराबाद पहुंचा तो उस समय सचिन टीम इंडिया की कैप पहन चुके थे। मैच से पूर्व मैंने सचिन को बधाई दी और आगे बढि़या करने के लिए शुभकामनाएं दीं। संयोग से हम लोगों का पहला मुकाबला मुंबई से हुआ और मेरी 60 रन की पारी पर सचिन ने शतक ठोक पानी फेर दिया। मास्टर बल्लेबाज की 110 रन की उस पारी को देख मैंने महसूस किया वह पूरी तरह मैच्योर हो चुके थे। क्रिकेट की समझ और सीखने की ललक उनमें शुरू से ही थी। संन्यास की घोषणा के बाद भी वह अंतिम दो मैच के लिए परिश्रम कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि क्रिकेट को वह कितना प्यार करते हैं और अच्छे प्रदर्शन की इच्छा-शक्ति आज भी उनमें है। हम चाहेंगे कि आगे भी सचिन क्रिकेट से जुड़े रहें और आने वाली पीढ़ी का मार्गदर्शन करें।
(अरुण सिंह से बातचीत पर आधारित)
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