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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 20, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'मानों सामने भगवान खड़ा हो'

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Published: Sun, 20 Oct 2013 07:00 PM (GMT+05:30)Updated: Mon, 21 Oct 2013 06:19 PM (GMT+05:30)

(सौरभ तिवारी) एक अनूठा एहसास। जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, सिर्फ महसूस किया जा सकता है। ...और पढ़ें

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(सौरभ तिवारी) एक अनूठा एहसास। जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, सिर्फ महसूस किया जा सकता है। एहसास भी ऐसा मानों, पल में सदियां गुजर गई। कुछ नहीं समझ आया, क्या करें। उनसे पहली बार जब सामना हुआ। मानों सामने भगवान खड़ा हो। वह भी मुंबई इंडियंस के ड्रेसिंग रूम में। जब पहली बार सचिन तेंदुलकर हमारे सामने आए। ऐसा लगा, मुझे पूरी कायनात मिल गई।

बचपन से था सचिन बनने का जुनून

बड़े हुए, क्रिकेट खेलना शुरू किया। तब हमारी पीढ़ी के खिलाड़ियों के सामने एक ही नाम था, सचिन तेंदुलकर। दूसरा कुछ था ही नहीं। मैं बायें हाथ का बल्लेबाज था, लेकिन जुनून था तेंदुलकर बनने और उनसे मिलने का। वक्तगुजरता गया। मैं अपने मकसद की ओर आगे बढ़ता गया। सचिन तेंदुलकर करियर में नए-नए रिकॉर्ड जोड़ते गए।

मुंबई इंडियंस में मिला मौका

तभी आइपीएल में मुझे मुंबई इंडियंस की ओर से खेलने का मौका मिला। सचिन सर उस टीम की रीढ़ थे। हम इस बात से बेहद खुश थे कि अब उनके नजदीक रहने और उनसे बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा। इससे बड़ी खुशी इस बात की थी कि उनके साथ हम खेलेंगे भी। वक्त गुजरता गया। आइपीएल शुरू होने वाला था।

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पूरी कायनात ही मिल गई

पहली बार जब मुंबई इंडियंस के ड्रेसिंग रूम में जाने का मौका तो सचिन सर वहां पहले से मौजूद थे। मैं ड्रेसिंग रूम में प्रवेश करने से पहले ठिठक गया। तभी सचिन सर उठकर हमारे सामने आकर खड़े हो गए। ऐसा लगा मानों भगवान ही सामने खड़ा हो गया हो। हम कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे। हमें घबराहट भी थी और परेशानी भी। उन्होंने कहा, चलो अंदर चलो। अपने लिए उनकी आवाज सुनते ही ऐसा लगा मानों पूरी कायनात ही हमें मिल गई।

बहुत कुछ बताते थे

ऐसा नहीं कि सिर्फ मुझे। सभी खिलाड़ियों को वह हमेशा बल्लेबाजी के बारे में बताते रहते थे। मुंबई इंडियंस के लिए जब हम एक दिन प्रैक्टिस कर रहे थे। तब सचिन सर काफी नजदीक से मेरी बल्लेबाजी देखते हुए मेरे करीब आए। उन्होंने कुछ एक शॉट को अपने अंदाज में खेलने का तरीका बताया।

साधारण व्यक्तित्व के मालिक हैं सचिन

विश्व के दिग्गज बल्लेबाज होने के बावजूद सचिन तेंदुलकर का व्यक्तित्व बहुत ही साधारण। शांत मिजाज और मृदु भाषी। सभी के साथ घुलमिल कर बात करना उन्हें अच्छा लगता है। उनके अंदर इस बात का जरा भी गुमान नहीं कि वह विश्व क्रिकेट के असाधारण बल्लेबाज हैं और हम लोग नए और अपरिचित क्रिकेटर। सभी के साथ सचिन का व्यवहार एक जैसा। हां क्रिकेट के प्रति उनका समर्पण। ऐसा बहुत कम क्रिकेटर के अंदर होता है। इसलिए तो विश्व क्रिकेट में वह असाधारण क्रिकेटर हैं और रहेंगे भी।

(झारखंड के रणजी खिलाड़ी सौरभ की कामरान हाशमी से बातचीत पर आधारित)

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